उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक महिला समलैंगिक जोड़े ने पुलिस सुरक्षा की मांग की है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि परिवार वालों के विरोध और गंभीर परिणाम भुगतने की कथित धमकी के बाद जोड़े ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। जोड़े का कहना है कि उनके घर वालों ने दोनों के साथ रहने के फैसले का विरोध करते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगते की धमकी दी है। शामली की जिला मजिस्ट्रेट जसजीत कौर के अनुसार, 22 और 23 साल की दो युवतियां अपनी जान को खतरा पाकर अपने गांव से भाग गईं। कौर ने कहा, वह दोनों वयस्क हैं और जहां चाहें वहां रहने के लिए स्वतंत्र हैं। जसजीत कौर ने बताया कि यह जोड़ा शुक्रवार की शाम को पुलिस सुरक्षा के लिए अधिकारियों के पास पहुंचा था।

उन्होंने बताया कि दोनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और उनके बयान के आधार पर आदेश जारी किया जाएगा। बता दें कि 5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए वयस्कों के बीच सहमति से समलैंगिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इसके साथ ही न्यायालय ने धारा 377 को स्पष्ट रूप से मनमाना करार दिया था। अलग-अलग लेकिन एकमत फैसले में, चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस ए.एम. खानविल्कर, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को आंशिक रूप से असंवैधानिक करार दिया था। पीठ ने कहा था कि एलजीबीटीआईक्यू लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर/ट्रांससेक्सुअल, इंटरसेक्स और क्वीर/क्वेशचनिंग) समुदाय के दो लोगों के बीच निजी रूप से सहमति से सेक्स अब अपराध नहीं है। फैसले को पढ़ते हुए चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि दूसरे की पहचान को स्वीकार करने के लिए दृष्टिकोण और मानसिकता को बदलने की जरूरत है।

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