अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा सक्त्ती जिले में मन्दिर में जीभ काटकर चढ़ाने का मामला सामने आया है. डभरा ब्लॉक के ग्राम देवरघटा में शिव मंदिर में एक 16 साल की लड़की ने शिवलिंग पर अपनी जीभ काटकर चढ़ा दिया. लड़की को देखने के लिए ग्रामवासी और आस पास के लोगों भीड़ जुट रही है. यह मंदिर देवरघटा के सोंठी पारा में स्थित है.
इसके पहले पिछले दिनों बलरामपुर जिले के एक व्यक्ति कमलेश नगेशिया ने अपने 4 वर्ष के बच्चे की बलि दे दी उसके कुछ दिनों पहले नवरात्रि में भी कोरिया जिले में एक धनेश्वर नामक बालक की बलि का मामला सामने आया था अंधविश्वास के कारण यह घटनाएं अत्यंत दुखद है ग्रामीणों को अंधविश्वास नहीं करना चाहिए एवं कानून को हाथ में नहीं देना चाहिए
डॉ दिनेश मिश्र ने कहाअंधविश्वास में पड़ कर व्यक्ति मानसिक रुप में असंतुलित हो जाता है और वह मिथकों पर पूरी तरह भरोसा करने लगता है, कही सुनी किस्से कहानियां , भ्रामक खबरें अफवाहें उसे और भी भ्रमित कर देती हैं और वह अपराध कर बैठता है .
डॉक्टर दिनेश मिश्र ने कहा लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने की आवश्यकता है जिससे लोग सुनी सुनाई घटनाओं अफवाहें और भ्रामक खबरों पर भरोसा ना करें और अंधविश्वास में ना पड़े
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा कुछ मामलों में व्यक्ति किसी इष्ट देवी, देवता ,का सपना आने और सपने में बलि मांगने की बात भी कहते हैं और कहते हैं कि उन्होंने उनके आदेश पर किसी की बलि /कुर्बानी दे दी है जबकि लोगों को यह सोचने की आवश्यकता है कि किसी की जान लेकर कर कोई भी व्यक्ति सफल नहीं हो सकता और उसे अपराध करने के करण अंततः जेल जाना पड़ता है.
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा अंधविश्वास के करण जो व्यक्ति मानसिक उद्वेग में चला जाता है तब वह कई बार स्वयं के अंदर किसी अदृश्य शक्ति में प्रवेश होने की बात भी करता है तथा वह किसी के सपने में आने या किसी के आदेश देने या कानों में आवाज सुनाई पढ़ने ऐसी बातें भी करता है जबकि यह एक प्रकार का मानसिक विचलन का ही कारण है ,यह एक प्रकार का मासिक संतुलन का प्रतीक है और बहुत सारे लोग बहुत संवेदनशील होते हैं और वह भावावेश में आकर कानून हाथ में लेते हैं, इनमें से कुछ लोग सार्वजनिक रुप से भी असंतुलित व्यवहार भी प्रकट करते हैं जैसे झूमना ,बड़बड़ाना मारना पीटना आदि .

अंधश्रध्दा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा कि इस तरह की भक्ति भावना से कोई कभी खुश नहीं होता है। न ही शास्त्रों में इस तरह की कोई विधि बताई गई है। सच्ची मनोकामना से भक्ति कीजिए, हमेशा सभी को सुख समृध्दि मिलेगी हैं। न कि देवी देवता किसी पशु बलि की मांग करते हैं, यदि आप किसी देवी देवताओं में आस्था रखते हैं। तो उनकी पूजा अर्चना करें, लेकिन किसी जीव की बलि देना या अपना कोई अंग काटकर चढ़ाना देव प्रसन्न करने की अंधविश्वास है। इसे कानूनी
अपराध भी माना गया है। हमारे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग है, लोग अपनी जीभ, उगली, काटकर धार्मिक स्थल में
समर्पित करते हैं इसके बाद जीवनभर के लिए अपंग हो जाते हैं।

ऐसे में किसी चिकित्सक को किसी को दिखाया जाए उसका उपचार हो ,उसकी सभी तरह से काउंसलिंग की जाए तो व्यक्ति ठीक हो जाता है. और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है

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