राजनांदगांव। जब कोई रोग किसी से भेदभाव नहीं करता तो रोगी से भला हम क्यों भेदभाव करें? बेहतर होगा कि हम उसे जागरूक करें और उसकी मदद करें। किसी का मानसिक स्वास्थ्य यदि असहज हो जाए तो हमें उसे बताना चाहिए कि, यह एक रोग है जो उपचार कराने से ठीक भी हो सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पूरे विश्व में 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। हर साल यह दिवस मनाने के दो ही प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला है-लोगों में इस बात का विश्वास दिलाया जा सके कि, किसी भी शारीरिक बीमारी की तरह ही मानसिक बीमारी को भी दवाओं और बातचीत के जरिए ठीक किया जा सकता है। वहीं दूसरा उद्देश्य है-विश्व में हर तबके के लोगों को इस बीमारी के बारे में भी पता चले और वह उस लिहाज से उसके बचाव के लिए पहले से तैयार रहें। माना जाता है, सामान्य इंसान यदि सोचने-समझने व समाज के साथ तालमेल बिठाने का सामर्थ्य रखता है और अपने काम आसानी से कर सकता है तो यह साफ संदेश है कि उसका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर है, लेकिन कभी-कभी उम्र के किसी दौर में काम के तनाव या रिश्ते की नाकामियों से घबराकर किसी तरह के रोजमर्रा के काम पर असर पड़ता है, गलतफहमियां बढऩे लगती हैं या फिर वह समाज से संयोजन बिठाने में असफलता का अनुभव करने लगता है तो यह संकेत है, उसमें कुछ मानसिक विकार पैदा हो गए हैं, जिसे समय पर इलाज कराकर ठीक भी किया जा सकता है। विश्व भर में हर साल 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाकर मानसिक स्वास्थ्य के ही विषय में लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए इस साल भी लोगों को विभिन्न माध्यमों से प्रेरित किया जाएगा कि, मनोरोग से डरें नहीं, बल्कि उसका उपचार कराएं। इस बारे में सीएमएचओ राजनांदगांव डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया, तेजी से बदलते माहौल और भाग-दौड़ वाली जीवनशैली की वजह से तनावग्रस्त लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। किसी को भी मानसिक असंतुलन का आभास होने लगे तो उन्हें बिना देरी किए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इसका उपचार संभव है। लेकिन, कई लोग अभी भी मानसिक बीमारी के बारे में बात करने से डरते हैं। उन्होंने बताया, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए योगा भी एक अच्छा माध्यम है।
मानसिक रोग के लक्षण
सीएमएचओ डॉ. चौधरी बताते हैं, मानसिक रोग के लक्षणों को यदि समय पर पहचान लिया जाए तो उचित इलाज के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। हालांकि, हर मानसिक बीमारी के लक्षण उसके कारक और परिस्थितियों के आधार पर भिन्न होते हैं और ये भावनाओं, विचारों और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। मानसिक बीमारी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं जिनमें उदास महसूस करना, व्याकुल होना, ध्यान केंद्रित करने में कमी होना, भय या चिंता से ग्रस्त होना, बार-बार मनोदशा में परिवर्तन होना, थकान-कमजोरी होना, नींद में दिक्कतों का सामना करना, कभी-कभी दैनिक कार्यों में असमर्थता और भूलने की समस्या होना शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर दो घंटे से ज्यादा बिताना खतरनाक : डॉ. मनोरे
मनोरोग चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शरद मनोरे ने बताया, सोशल मीडिया पर छाए रहने की सनक भी युवाओं को मनोरोगी बना रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे विभिन्न एप भी युवाओं के दिलो-दिगाम पर हावी हो चुके हैं जबकि सोशल मीडिया पर दो घंटे से ज्यादा बिताना मनोरोग का संकेत है। सोशल मीडिया पोस्ट पर लाइक, कमेंट या व्यू न आने से यूजर्स में नकारे जाने का भाव पैदा होता है। इससे भावनात्मक बोझ बढ़ता है। वे अन्य दोस्तों के सोशल मीडिया कनेक्शन देख सोचते हैं कि दूसरे लोग ज्यादा खुश हैं। इसी तरह वेब सीरीज, गेमिंग और स्मार्टफोन से लोकप्रियता और पैसे कमाने का चस्का भी बीमार बना रहा है। नतीजतन युवा भी अवसाद, कुंठा और भूलने जैसी बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31