22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 25 सैलानियों की हत्या उनकी पत्नी और परिजनों के सामने की. आतंकियों की इस कायराना हरकत ने देश और दुनिया को एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संदेश दिया. इस आतंकी घटना के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकानों तबाह कर दिए. भारत के इस एक्शन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए. पहलगाम हमले के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर ने अचानक से भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सबसे बड़े शृंगार सिंदूर को सुर्खियों में ला दिया. 

पीएम मोदी ने अपने आवास पर लगाया सिंदूर का पौधा

इसके बाद बीते दिनों पीएम मोदी ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर सिंदूर का एक पौधा लगाया. कुल मिलाकर सिंदूर लगातार सुर्खियों में बना है. ऐसे में हम आज आपको बिहार के उस शहर से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसकी पहचान में सिंदूर का अहम रोल है. 

बिहार का लखीसराय जिला सिंदूर उत्पादन के लिए मशहूर

दरअसल बिहार का एक छोटा सा शहर लखीसराय सिंदूर निर्माण के लिए पूरे प्रदेश के साथ-साथ आस-पास के राज्यों में मशहूर है. लखीसराय जिला सिंदूर और गुलाल निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाता है. यहां बने सिंदूर की सप्लाई बंगाल, दिल्ली, यूपी, उड़ीसा, अगरतल्ला, झारखंड, त्रिपुरा जैसे राज्यों में तो होती ही है, साथ ही भूटान और नेपाल से भी इसकी डिमांड होती है. 

अब समझिए लखीसराय से सिंदूर उप्तादन हब बनने की कहानी

किऊल नदी के किनारे बसे लखीसराय जिले में साल 1932 में सिंदूर का पहला कारखाना खोला गया था. शहर के पुरानी बाजार स्थित चितरंजनरोड में पहला चंडी प्रसाद मुरलीधर ड्रोलिया ने चंडी प्रसाद मुरलीधर ड्रोलिया कलर एंड केमिकल्स कंपनी के नाम से शुरू किया गया था. 

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पूरे बिहार में सिंदूर-रंग व गुलाल के 12 कारखाने, जिसमें से 5 लखीसराय में

बाद में लखीसराय में चार और रंग-सिं‍दूर और गुलाल की फैक्ट्रियां खोली गई. इस समय लखीसराय जिले में सिंदूर और रंग से जुड़े 5 कारखाना संचालित हो रहे हैं. बात पूरे बिहार की करें तो पूरे राज्य में कुल 12 सिंदूर और रंग फैक्ट्रियां  निबंधित हैं, जिसमें लखीसराय में अकेले कुल 5 फैक्ट्री है.

हर रोज करीब 20 से 25 टन सिंदूर-रंग व गुलाल का उत्पादन

यहां हर रोज करीब 20 से 25 टन सिंदूर, रंग और गुलाल का उत्पादन होता है. हालांकि त्योहार और लग्न के समय में यह आंकड़ा और बढ़ जाता है. कारखानों में सिंदूर निर्माण के साथ-साथ यहां घरेलू स्तर पर इसकी पैकिंग का काम भी होता है. जिससे स्थानीय स्तर पर कई लोगों को रोजगार मिलता है. 

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लखीसराय में सिंदूर उत्पादन के पीछे यहां की मिट्टी बड़ी वजह

लखीसराय में सिंदूर के कारखानों के पीछे यहां की मिट्टी का भी बड़ा योगदान है. यहां की रे मिट्टी को जिसे आम तौर पर रेगुर मिट्टी और कपास की मिट्टी भी कहा जाता है. जिसका रंग काला होता है. इसमें जल धारण की क्षमता आम मिट्टी की अपेक्षा अधिक होती है. जिस कारण यह बहुत जल्दी चिपचिपी हो जाती है. इसमें लाइम, आयरन, मैग्नेशियम और पोटाश होते हैं. इन्ही विशेषताओं के कारण यह मिट्टी सिंदूर और गुलाल निर्माण के सभी पैमानों पर खड़ा उतरती है. 

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