सोलर लाइट घोटाले पर हाईकोर्ट सख्तः रिपोर्ट पेश करने सितंबर तक का दिया समय, जानिये क्या है सोलर लाइट घोटाला

क्या है सोलर लाईट घोटाला?

2021-22 में प्रदेश की ग्रामीण पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना चलाई गई थी। इसमें स्थानीय स्तर पर बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए करोड़ों की खरीद हुई। कई स्थानों पर लाइटें या तो नहीं लगीं या फिर खराब गुणवत्ता की निकलीं। इस योजना में भारी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिन पर अब हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। क्या कहता है नियम? छत्तीसगढ़ शासन, ऊर्जा विभाग द्वारा परिपत्र क्रमांक 2129/एफ-26/05/2014/ तेरह-2, दिनांक 07 अक्टूबर 2014 के माध्यम से समस्त विभाग प्रमुखों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायतों को निर्देशित किया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य में गैर पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत आधारित योजनाओं को प्रोत्साहित करने तथा इन योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु राज्य शासन द्वारा छ.ग. राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा) का गठन किया गया है तथा भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राज्य में इस हेतु क्रेडा राज्य की नोडल एजेंसी है। अतः प्रदेश के सभी विभागों/जिलों में गैर पारंपरिक ऊर्जा योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक उपकरणों के क्रय/स्थापना तथा योजना के संचालन एवं संधारण का कार्य क्रेडा के माध्यम से किया जाए। राज्य शासन द्वारा उपरोक्त निर्णय का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किये गये थे। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पंप का स्थापना कार्य क्रेडा के स्थान पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कराये जाने के विभागीय प्रस्ताव पर तत्कालीन भारसाधक मंत्री ऊर्जा विभाग, माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा अनुमोदित ऊर्जा विभाग के पत्र के माध्यम से स्पष्ट असहमति व्यक्त की गई थी। ज्ञात हुआ है कि राज्य शासन के उपरोक्त निर्देशों की अवहेलना होने की जानकारी संज्ञान में आने पर तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, क्रेडा द्वारा पत्र के माध्यम से सभी विभागाध्यक्ष, कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायतों को राज्य शासन के उपरोक्त निर्देशों के विपरीत स्वयं निविदा आमंत्रित कर कराये जा रहे कार्यों की गुणवत्ता, एकरूपता, संचालन रखरखाव इत्यादि के मापदण्डों का पालन नहीं करने के कारण संयंत्रों के अकार्यशील होने की स्थिति से आगाह किया गया। साथ ही, सभी विभागों से अनुरोध किया गया कि अक्षय ऊर्जा आधारित योजनायें अन्य विभागों द्वारा स्वयं क्रियान्वित नहीं की जावें, अपितु इस हेतु राज्य की अधिकृत एजेंसी क्रेडा द्वारा कराये जाने के निर्देश प्रसारित करने का अनुरोध किया गया था। किन्तु पिछली सरकार में कांग्रेस कार्यकाल के दौरान इन नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। कांग्रेस सरकार के उक्त कार्यकाल (2021-22) के दौरान ग्राम पंचायतों के माध्यम से की गई सोलर लाइट योजनाओं में घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह सितंबर 2025 तक इस मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करे। इस मामले में आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में ग्राम पंचायतों को सीधे एजेंसी बनाकर करोड़ों रुपये की सोलर लाइटें बिना पारदर्शी प्रक्रिया के खरीदी गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक गर्माहट का कारण बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बनी सरकार ने सत्ता में आते ही सभी विभागों के मंत्रियों एवं छत्तीसगढ़ के सभी कलेक्टरों को किसी भी प्रकार के सौर ऊर्जा संयंत्रों के स्थापना का कार्य संबंधित विभागों द्वारा सीधे नही कराया जा कर राज्य में सौर ऊर्जा से संबंधित कार्यों के क्रियान्वयन के लिए नामित नोडल एजेंसी क्रेडा के माध्यम से ही कराए जाने के निर्देश दिये थे, ताकि इन कार्यों का रखरखाव बेहतर तरीके से नोडल एजेंसी क्रेडा द्वारा संपादित किया जा सके। क्रेडा के सी.ई.ओ. का पदभार ग्रहण करने के साथ ही श्री राजेश सिंह राणा द्वारा भी इस संबंध में संबंधित विभागों एवं कलेक्टरों से पत्राचार कर आग्रह किया गया था ताकि प्रदेश में सौर संयंत्रों की अच्छी गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सौर संयंत्रों की स्थापना का कार्य क्रेडा के माध्यम से ही कराए जाये।

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