छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत मुआवजा वितरण में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया है। इन पर जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में धोखाधड़ी, खाता विभाजन में हेरफेर और कमीशन के बदले झूठी रिपोर्ट तैयार करने के आरोप हैं।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में गोपाल राम वर्मा (सेवानिवृत्त अमीन, जल संसाधन विभाग), नरेंद्र कुमार नायक (लोकसेवक), खेमराज कोसले (पूर्व जिला पंचायत सदस्य, अभनपुर जनपद अध्यक्ष), पुनुराम देशलहरे (पूर्व सरपंच, नायकबांधा), भोजराम साहू और कुंदन बघेल (पूर्व अध्यक्ष, नगर पंचायत अभनपुर) शामिल हैं। EOW के मुताबिक, कुछ राजस्व विभाग के अधिकारी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया कि जल संसाधन विभाग के दो अधिकारियों ने पूर्व में अधिग्रहित भूमि पर जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार की। अन्य चार व्यक्तियों ने फरार अधिकारियों के साथ मिलकर बटांकन और राजस्व प्रक्रियाओं में हेरफेर किया। इस पूरे षड्यंत्र के तहत किसानों से भारी भरकम कमीशन वसूला गया।

EOW अधिकारियों के अनुसार, फर्जी खाता विभाजन और गलत दस्तावेजों के आधार पर अधिक मुआवजा दिलवाने की साजिश को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।

मामले में आगे की जांच जारी
EOW ने आरोपियों को विशेष न्यायालय रायपुर में पेश किया है और उनके खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। फरार अधिकारियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है, और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

क्या है भारतमाला प्रोजेक्ट?
भारत सरकार की भारतमाला योजना एक मेगा हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल बिछाया जा रहा है। इस योजना में जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को मुआवजा दिया जाता है, जिसे लेकर यह घोटाला सामने आया है।

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