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राजस्थान के भव्य किलों और रंगीन संस्कृति की छवि दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसी धरती पर एक ऐसा किला भी है जिसे लेकर डर और रहस्य की कहानियां दशकों से लोगों के मन में बसे हैं। अलवर जिले की अरावली पहाड़ियों में बसा भानगढ़ किला, न केवल अपने स्थापत्य और इतिहास के लिए, बल्कि इसके पीछे छिपे डरावने किस्सों के लिए भी जाना जाता है। यही कारण है कि सूरज डूबने के बाद यहां किसी को रुकने की अनुमति नहीं है।
इतिहास में दर्ज है भानगढ़ का वैभव

भानगढ़ किले की नींव 16वीं शताब्दी में आमेर के राजा भगवंत दास ने रखी थी। उन्होंने इसे अपने पुत्र माधो सिंह के लिए बनवाया था, जो अकबर की सेना में उच्च पद पर थे। उस समय भानगढ़ एक समृद्ध नगर था – यहाँ महल, बाजार, मंदिर और सामाजिक गतिविधियों की भरमार थी। लेकिन समय के साथ यह क्षेत्र वीरान होता गया, और इसके पतन की कहानियों ने इसे भूतिया बना दिया।

भानगढ़ से जुड़े सबसे चर्चित रहस्य

1. साधु बलूनाथ का श्राप

कहा जाता है कि जिस स्थान पर यह किला बना, वहाँ एक तपस्वी साधु बलूनाथ ध्यान में लीन रहते थे। उन्होंने राजा को चेतावनी दी थी कि किले की परछाईं उनके तपस्थल पर न पड़े। पर जब निर्माण पूरा हुआ, तो किले की छाया वहां तक पहुँच गई। इससे क्रोधित होकर साधु ने पूरे क्षेत्र को श्राप दे दिया, जिसके बाद यह स्थान उजड़ गया।

2. राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक की कथा

भानगढ़ की सुंदर राजकुमारी रत्नावती पर एक तांत्रिक सिंघिया मोहित हो गया था। उसने राजकुमारी को वश में करने के लिए जादू किया, लेकिन चालाक रत्नावती ने उसकी मंशा भांप ली और तांत्रिक की मृत्यु हो गई। मरने से पहले उसने पूरे किले और इसके निवासियों को श्राप दे दिया, जिससे यहाँ की आत्माएं आज भी भटकती बताई जाती हैं।

क्या है आज भानगढ़ की स्थिति

आज भानगढ़ किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन संरक्षित स्मारक है। यहां दिन के समय आम पर्यटक आ सकते हैं, लेकिन सूरज डूबते ही प्रवेश पर रोक लग जाती है। स्थानीय लोग और सुरक्षाकर्मी साफ तौर पर कहते हैं — “सूर्यास्त के बाद यहां रुकना मना है।” रहस्य से भरे इस स्थल पर रात के अंधेरे में किसी की मौजूदगी न केवल खतरनाक मानी जाती है, बल्कि इसके दुष्परिणामों की कहानियां भी सुनाई जाती हैं।

भानगढ़ घूमने की जानकारी

समय: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है। सूर्यास्त के बाद प्रवेश वर्जित है।

टिकट: भारतीय नागरिकों के लिए ₹20–₹50 और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹200–₹300 तक शुल्क हो सकता है।

फोटोग्राफी शुल्क: 
व्यावसायिक फोटोग्राफी के लिए अलग से अनुमति और शुल्क लग सकता है।

भानगढ़ किला आज भी इतिहास, रहस्य और भय के मिश्रण का जीवित उदाहरण है। यह न सिर्फ रोमांच प्रेमियों बल्कि इतिहास के विद्यार्थियों के लिए भी एक रोचक गंतव्य है। अगर आप राजस्थान के अलवर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो दिन के उजाले में इस रहस्यमयी किले की सैर ज़रूर करें — लेकिन सूर्यास्त से पहले वहां से लौटना न भूलें।

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