नई दिल्ली। चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिवीशेल बैचलेट को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रदान किया, जो इंदिरा गांधी स्मारक ट्रस्ट की अध्यक्ष भी हैं। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, निर्णायक मंडल के अध्यक्ष शिवशंकर मेनन और अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बैचलेट को पुरस्कार प्रदान करते हुए सोनिया गांधी ने उनके न केवल अपने देश के लिए, बल्कि वैश्विक शांति के लिए उत्कृष्ट योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि बैचलेट ने अपने शुरुआती वर्षों में क्षति, उत्पीड़न, यातना और निर्वासन को प्रत्यक्ष रूप से देखा है।उन्होंने कहा कि यह एक उल्लेखनीय संयोग है कि इंदिरा गांधी और बैचलेट दोनों महिलाएं अशांति के दौर में पैदा हुईं और पली-बढ़ीं।

सोनिया गांधी ने कहा कि बैचलेट कई वर्षों बाद चिली वापस लौटीं तो उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और साथ ही उन्होंने अपने देश को एक लोकतंत्र में बदलते हुए भी देखा। उन्होंने महिला उत्थान और लैंगिक समानता के लिए बैचलेट के कार्यों की विशेष रूप से प्रशंसा की। सोनिया गांधी ने कहा कि उनका काम सभी के लिए, खासकर महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के प्रयासों पर आधारित रहा है।

बैचलेट ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुने जाने पर अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने दिल्ली में हुई हालिया आतंकवादी घटना पर भी दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिंसा कभी समाधान नहीं होती; शांति ही हमेशा हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है।

चिली की पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि इंदिरा गांधी का मानना था कि राष्ट्र तभी समृद्ध हो सकते हैं जब वे एक-दूसरे के साथ सद्भाव से रहें। उन्होंने आगे कहा कि आज की विभाजित दुनिया में यह विश्वास और भी अधिक महत्वपूर्ण प्रतीत होता है।बैचलेट ने अपने भाषण का समापन हिंदी में धन्यवाद कहकर किया।

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