बिहार के मुजफ्फरपुर से एक दर्दनाक खबर सामने आई है,  एक पिता ने अपने 5 बच्चों को फांसी से लटका कर सुसाइड कर लिया है, जिसमें 3 बच्चियों और पिता की दर्दनाक मौत हो गई और दो बेटे चमत्कारिक ढंग से बच गए. तस्वीरें सामने आईं तो दिल दहल गया. छोटी-छोटी तीन बच्चियां मां की साड़ियों से बने फंदों में कैद होकर दुनिया को अलविदा कह गईं. सपने देखना तो अभी इन बच्चियों ने शुरू भी नहीं किया होगा, उससे पहले ही काल ने उन्हें लील लिया. जो वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें दिख रहा है कि कच्चा घर है और घर के अंदर दो चूल्हे वो भी मिट्टी के…पास में तीन अंडों के खोल रखे हैं, जिनसे साफ है कि रात में अंडे की सब्जी बनी होगी. न ज्यादा बर्तन न कोई डिब्बे और सामान, एक संदूक और दो चारपाई जरूर दिखीं. देखकर ही समझ आ रहा है कि घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. पड़ोसियों ने मीडियाकर्मियों को बताया कि इन पांच बच्चों की मां की मौत पिछले साल हो गई थी. पिता भी कमाते नहीं थे, बस घूमते रहते थे. खाना-पीना बड़ी लड़की संभाल रही थी, वो भी पड़ोस और दूसरे लोगों की मदद से जो इन्हें सरकारी राशन और अन्य मदद दे जाते थे.घर ऐसे ही चल रहा था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि पिता बच्चियों के लिए इतना भयावह कदम उठा लेगा कि बच्चों के साथ खुद की जीवनलीला भी ऐसे समाप्त कर लेगा.

 चमत्कार कहें या कुछ और कि 6 साल का शिवम और 5 साल का चंदन अपने पिता के भयावह कृत्य से बच गया. शिवम की आंखों में पिता और बहनों को खोने का खौफ साफ दिख रहा था. रात जो उनके घर में हुआ वह उसे कभी भुला नहीं पाएगा. उसने बताया कि पिता मैदान (शौच) गए थे, वहां से लौटे और सबको फांसी पर लटकाकर खुद भी फांसी लगा लिए. शिवम से जब पूछा गया कि आप कैसे बचे तो उन्होंने बताया,” मैंने खुद ही अपनी साड़ी से बनी रस्सी खोल ली.” ऐसा लगता है कि नीचे रखी पेटी से दोनों बेटों का पैर टकराया और दोनों गले में बंधी साड़ी खोलकर बचने में कामयाब रहे.

घटना होने के बाद कई घंटे बाद तक डर के कारण दोनों बच्चे दुबके रहे और आंख भी नहीं खोल रहे थे. मरने वालों में पिता अमरनाथ राम और तीन बहनें 12 साल की अनुराधा, 11 साल की शिवानी और 7 साल की राधिका शामिल हैं.तीनों ही बहनें बड़ी थीं, कहीं अंधविश्वास का एंगल तो नहीं है, इसे लेकर भी जांच की जा रही है. पुलिस ने सुसाइड के कारण से जुड़ा कोई औपचारिक बयान नहीं दिया, लेकिन पड़ोसियों का कहना है कि वह अपनी पत्नी की मौत के बाद मानसिक रूप से परेशान रहता था और वह कोई काम धंधा भी नहीं करता था, बड़ी लड़की ही घर को संभाल रही थी. लोग खाने का राशन आदि दे देते थे तो वह बनाकर सबका पेट भर देती थी. वह बच्ची खुद 12 साल ही थी, लेकिन बड़ों की तरह अपने भाई-बहनों को संभाल रही थी, जिसकी जान उसकी मां की ही साड़ी से पिता ने ले ली. ये वही साड़ियां थीं, जो उसकी मां की यादें थीं, जिनसे वे तीनों घर-घर खेलती होंगी,मां को याद कर सिर पर रख लेती होंगी, लेकिन क्या पता था इन्हीं से पिता फंदा बनाकर बच्चियों को लटका देगा.

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