मूल रूप से बडगाम के रहने वाला डॉ. फई प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी का समर्थक है और जिसे नामित आतंकवादी और हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का करीबी सहयोगी माना जाता है। उसे US में भी जेल हो चुकी है।
पीटीआई, श्रीनगर,जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की एक स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को अमेरिका में रहने वाले कश्मीरी लॉबिस्ट और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के दोषी एजेंट गुलाम नबी शाह उर्फ ‘डॉ. फई’ की 1.5 कनाल से अधिक (एक कनाल 5,445 वर्ग फुट के बराबर) भूमि कुर्क करने का आदेश दिया है। NIA के स्पेशल जज याह्या फिरदौस ने बडगाम जिले के दो गांवों – वाडवान और चट्टाबुघ में 1.5 कनाल (लगभग 8,100 वर्ग फुट) से ज़्यादा जमीन जब्त करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने बडगाम जिला कलेक्टर को रेवेन्यू और पुलिस अधिकारियों की मदद से डॉ. फई की संपत्ति पर तुरंत कब्जा करने का निर्देश दिया। सहायक लोक अभियोजक मोहम्मद इकबाल राठेर ने आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 85) के तहत फई की संपत्ति कुर्क करने का अनुरोध करते हुए अर्जी दायर की थी जिसके बाद न्यायाधीश यहाया फिरदौस ने यह आदेश पारित किया। अर्जी में कहा गया कि इस अदालत ने 2020 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी को पहले ही फरार घोषित कर दिया है।
सात पन्नों के आदेश में कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने सात पन्नों के आदेश में कहा, ‘‘…यह अदालत बडगाम के जिलाधिकारी को निर्देश देती है कि वह वडवान गांव में खेवट संख्या 60, सर्वे संख्या 466 के तहत एक कनाल और दो मरला भूमि तथा चट्टाबुघ गांव में खेवट संख्या 136, सर्वे संख्या 343 के तहत 11 मरला भूमि की अचल संपत्ति कुर्क करे और तत्काल कब्जा ले।’’साथ ही अदालत ने कहा, ‘‘संपत्ति कुर्क करने से पहले बडगाम के जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि संपत्ति की पहचान और सीमांकन के लिए राजस्व अधिकारियों की सहायता ली जाए।’’
कौन है डॉ. फई?
मूल रूप से बडगाम के रहने वाला डॉ. फई प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी का समर्थक है और जिसे नामित आतंकवादी और हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का करीबी सहयोगी माना जाता है। उस पर देश में एक आतंकवादी संगठन को समर्थन देने का आरोप है। फई को इस साल अप्रैल में कोर्ट ने ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया था, जब वह पुलिस के सामने पेश होने के 30 दिन के नोटिस का जवाब देने में विफल रहा। उसके खिलाफ 2020 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था।














