केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में घुसपैठियों को फिर से चेतावनी देते हुए कहा कि अब मैंने और हमारी पार्टी ने पूरे देश से घुसपैठिये को हटाने का संकल्प ले लिया है। जल्द ही इन घुसपैठियों को ठिकाना लगाया जाएगा। अमित शाह ने असम के बटाद्रवा परियोजना में अतिक्रमण विरोधी अभियान का समर्थन किया और हिमंत बिस्वा सरमा को खुली छूट भी दे दी।
नागांव जिले में बटाद्रवा सांस्कृतिक परियोजना का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए अमित शाह ने वैष्णव संत और समाज सुधारक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि पर कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों की उपस्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरे देश से सभी घुसपैठियों को हटाने का संकल्प लेती है। क्या शंकरदेव के इस स्थान पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का होना उचित था? उन्होंने अतिक्रमण हटाने और पवित्र नामघर को पुनः स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को बधाई दी।
एक लाख बीघा से अधिक की जमीन अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया गया
गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि कांग्रेस ने असम के लोगों, संस्कृति और पहचान के लिए खतरा पैदा करने वाले घुसपैठियों को अपना वोट बैंक बनाया। शाह ने कहा कि एक लाख बीघा से अधिक भूमि अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराई गई है और आरोप लगाया कि असम आंदोलन के दौरान किए गए बलिदानों के बावजूद पिछली कांग्रेस सरकारें कोई कार्रवाई करने में विफल रहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इतने वर्षों तक शासन किया, लेकिन उसने असम आंदोलन के लिए अपनी जान देने वालों के लिए कुछ नहीं किया।
गृहमंत्री ने गोपीनाथ बोरदोलोई की चर्चा की
गृह मंत्री ने भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई की विरासत की भी चर्चा की और असम के पहले मुख्यमंत्री को इस बात का श्रेय दिया कि उन्होंने असम और पूर्वोत्तर को भारत का हिस्सा बनाए रखा। शाह ने कहा कि अगर गोपीनाथ जी नहीं होते, तो असम और पूरा पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा नहीं होता। उन्होंने ही जवाहरलाल नेहरू को असम को भारत में रखने के लिए मजबूर किया था।














