गणतंत्र दिवस 2026 पर कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना अपने ‘मूक योद्धा’ पशु दस्ते का भव्य प्रदर्शन करने जा रही है. पहली बार, बैक्ट्रियन ऊंट, ज़ांस्कर पोनी, शिकारी पक्षी और सैन्य कुत्ते एक साथ परेड में शामिल होंगे.

परेड में सिर्फ रोबोटिक डॉग्स ही नहीं भारतीय नस्ल के डॉग्स भी पहली बार दिखेंगे                

इस साल 26 जनवरी को होने वाले परेड में रोबोटिक डॉग्स के अलावा असली के मूक योद्धा आपको दिखेंगे. अब तक विदेशी नस्लों के कुत्तों को ट्रेंनिंग देने के बाद सेना उनका इस्तेमाल करती थी लेकिन अब भारतीय नस्ल के कुत्तों को भी पहली बार सेना ने अपने दस्ते में शामिल किया है. ये कुत्ते दो तरह के हैं पहला डिटेक्शन यानि विस्फोटकों और नशीला पदार्थ की पहचान करने वाले और दूसरा प्रोटेक्शन यानि आतंकवादियों या दुश्मन पर हमला करने वाले. भारतीय नस्ल के कुत्तों में मुधोल हाउंड. रामपुर हाउंड.चिप्पी पराई, कोम्बई और राजापलायम नस्ल के शामिल है. इन सब कुत्तों को आरवीसी यानि रिमाउंट एंड वेटनरी कार्प में तैयार किया गया है जबकि इनकी ट्रेनिंग आर्मी डाग ट्रेनिंग स्कूल में दी गई है. दक्षिण भारतीय नस्ल कंबई नस्ल का सेना का डाग माधव लैंड माइंस की पहचान करने में मदद करता है. अलग अलग तरह के भारतीय सेना के डॉग्स अलग अलग काम में माहिर है.        

Latest and Breaking News on NDTV

माधव भी लेगा 26 जनवरी की परेड में हिस्सा 

कम्बई नस्ल का माधव भी इस परेड में हिस्सा लेगा. कम्बई दक्षिण भारत में कुत्तों की एक नस्ल है. इसका मुख्य काम डिटेक्शन जैसे काम का अंजाम देकर जवान को सुरक्षित रखना है. उत्तर भारत की एक नस्ल रामपुर हाऊंड के कुत्ते को शामिल किया गया है. ये उत्तराखंड के रामपुर में ग्रे हाउंड के साथ क्रॉस करके ये नस्ल बनी है. बाकी सारी दक्षिण भारतीय नस्ल के सेना के डॉग्स को शामिल किया गया है.

बैक्ट्रियन ऊंट और जास्कर पोनी भी परेड में हिस्सा लेगी 

चीन बार्डर पर लेह लद्दाख जैसे ठंड के रेगिस्तान में भारतीय सेना को रसद पहुंचाने में मदद करने वाला बैक्ट्रियन कैमेल भी पहली बार परेड में दिखेंगे लद्दाख का बैक्ट्रियन ऊंट….सेना के कंटीजेन में दो बैक्ट्रियन कैमेल हिस्सा लेंगे…इस ऊंट की खासियत है कि ये 15000 फिट की ऊंचाई पर माइनस डिग्री तामपमान पर दुर्गम रास्तों पर बिना खाए पीए कई दिन तक चल सकता है…भारतीय सेना इसका इस्तेमाल अपने सभारी भरकम सामान को पहुंचाने में भी करती है..ये दुर्गम रास्तों पर 250 किमी ग्राम तक सामान लादकर सेना के अंतिम चौकी तक सामान पहुंचा सकती है…इसको विशेष तौर पर एलएसी के पास दुर्गम रास्तों पर सामान पहुंचाने में किया जा है.

Latest and Breaking News on NDTV

जास्कर पॉनी भी परेड में दिखेगी 

26 जनवरी का दूसरा आकर्षण जास्कर पॉनी है. पॉनी में ये दुर्लभ प्रजाति की है. लद्दाख के जांस्कर घाटी में पाए जाने वाली पॉनी 60 किलोग्राम तक सामान लादकर ये खडी चढ़ाई और ग्लेशियर से भरे पहाड़ों पर जा सकती है. 2020 में सियाचीन ग्लेशियर में भारतीय सेना के साथ जांस्कर पॉनी ने सियाचीन के इन दुर्गम रास्तों को पार किया था. इंसान के साथ इसका सहयोगी व्यवहार और अत्याधिक ठंड के वक्त सेना के मजबूत सहयोग के चलते इस बार इसको परेड में शामिल किया जा रहा है.

परेड में शिकारी पक्षी भी दिखेंगे                                  

परेड में चार इलीट रैप्टर पक्षी भी दिखेंगे…ये शिकारी पक्षी होते हैं इनके सिर पर एक छोटा सा कैमरा रहता है और इनको इस तरह से तैयार किया गया ताकि बेहद छोटे ड्रोन को भी ये गिरा सके…इन रैप्टर्स का प्रयोग सेना दुश्मन की टोह लेने और छोटे ड्रोन को  गिराने में इस्तेमाल किया जाता है.

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930