महाराष्ट्र के नागपुर में एक बेहद चौंकाने और अमानवीय मामला सामने आया है, जहां दिहाड़ी मजदूरी करने वाले माता-पिता अपने 12 वर्षीय बेटे को रोजाना घर में जंजीरों से बांधकर काम पर चले जाते थे. यह सिलसिला करीब दो महीने तक चला. माता-पिता का दावा था कि उनका बेटा ‘आदतन मोबाइल चोर’ है और इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया. घटना का खुलासा शुक्रवार 2 जनवरी 2026 को तब हुआ, जब महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली. इसके बाद संयुक्त टीम ने बच्चे को उसके घर से मुक्त कराया. बचाव दल जब मौके पर पहुंचा, तब बच्चा एक बाल्टी के ऊपर खड़ा था और उसके हाथ-पैर जंजीरों और रस्सियों से बंधे हुए थे. सूत्रों के मुताबिक, माता-पिता रोज सुबह करीब 9 बजे बच्चे को बांधकर काम पर निकल जाते थे और कई घंटों बाद लौटते थे.
बचाव के बाद बच्चे को तुरंत सरकारी बाल गृह में भेज दिया गया. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल जांच में उसके हाथों और पैरों पर जंजीरों और रस्सियों से बने घाव पाए गए, जो कम से कम दो से तीन महीने पुराने बताए जा रहे हैं. डॉक्टरों ने बच्चे में शारीरिक चोटों के साथ-साथ मानसिक आघात के संकेत भी बताए हैं. सूत्रों के अनुसार, बच्चे को व्यवहार संबंधी समस्याएं थीं और इसी को लेकर अजनी पुलिस थाने को पहले भी सूचित किया गया था. माता-पिता बच्चे की कथित गलत हरकतों, खासकर चोरी की घटनाओं से परेशान थे. इसी कारण उन्होंने उसकी पढ़ाई भी छुड़वा दी थी और उसे स्कूल से हटा लिया गया था.
अब आगे क्या?
पुलिस का कहना है कि इस मामले को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के सामने पेश किया जाएगा, ताकि बच्चे के भविष्य और पुनर्वास को लेकर उचित फैसला लिया जा सके. साथ ही माता-पिता के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत जांच शुरू कर दी गई है. यह घटना न केवल बाल अधिकारों के गंभीर उल्लंघन को उजागर करती है, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है. प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और बच्चे को हरसंभव संरक्षण और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी.














