नई दिल्ली: भारतीय सेना स्वदेशी ‘सुसाइड’ ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन की बड़ी खेप खरीदने जा रही है। ये आत्मघाती ड्रोन विस्फोटकों से लैस होंगे और दुश्मन के इलाके में घुसकर उनके ठिकाने को तबाह कर देंगे। ये ऐसे ड्रोन हैं, जो जैमिंग (रडार सिग्नल जाम करने) और स्पूफिंग (गलत रडार सिग्नल भेजने) वाले माहौल में भी अपना काम पूरा करने में सक्षम होते हैं। मतलब, दुश्मन की सेना को भनक भी नहीं लगेगा और वे मिट्टी में मिला दिए जाएंगे। आर्मी की ओर से जल्द ही इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी किए जाने की संभावना है।

करीब 2,000 करोड़ रुपये की डील

इंडियन आर्मी के लिए इस डील की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि भारतीय कंपनियां देश में डिजाइन और विकसित किए गए लोइटरिंग म्यूनिशन की सप्लाई देने की तैयारियों में जुट गई हैं। शुरू में यह ठेका करीब 2,000 करोड़ रुपये का होगा और आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना बढ़ोतरी की संभावना है। क्योंकि, आर्मी अपनी कई तरह की यूनिट को ‘सुसाइड’ ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन से लैस करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि वे दुश्मन के क्षेत्र में कम दूरी तक या फिर ज्यादा भीतर तक घुसकर तबाही मचाने के काम आ सकें।

कुछ महीनों में आर्मी को मिलेंगे ड्रोन

सूत्रों का कहना है कि इस ऑर्डर को पूरा करने के लिए कई भारतीय कंपनियां आगे आएंगी, ताकि विदेशी कंपनियों पर से निर्भरता कम हो सके और आत्मनिर्भर भारत की मुहिम आगे बढ़ सके। सूत्रों के मुताबिक इस ऑर्डर से एक ऐसा स्वदेशी औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार होगा, जिससे सेना को जब भी जरूरत पड़े, भारतीय कंपनियां ऐसे सिस्टम तैयार करके दे सकें। ये टेंडर फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया की तहत जारी होंगे, ताकि कुछ महीनों के अंदर ही आर्मी इनकी ट्रायल भी कर सके और बेहतर विकल्प को छांटकर ऑर्डर भी जारी कर सके। परंपरागत प्रक्रिया में इस काम में कम से कम दो साल भी लग सकते हैं।

आर्मी के लिए कौन कंपनिया बनाएंगी ड्रोन

इन मामलों की जानकारी रखने वालों ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट में दो देशी कंपनियां शामिल होंगी, जिन्हें 60:40 के अनुपात में ठेका मिलेगा। यह वो कंपनियां होंगी, जिनके ड्रोन ट्रायल में खरे उतरेंगे और सभी विशेषताओं को पूरा करते हुए जिनकी बोली सबसे कम होगी। डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम कर रही कुछ बड़ी भारतीय कंपनियां पहले भी सेना को ऐसे सिस्टम दे चुकी हैं। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, अडानी डिफेंस, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ऐसी कंपनियों में शामिल हैं। निबे डिफेंस, ए विजन और एसएमपीपी जैसी कंपनियां भी बोली में शामिल हो सकती हैं।

आर्मी का ईगल ऑन एवरी आर्म क्या है

पिछले साल ही सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आर्मी में ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन शामिल करने की योजना बताते हुए विशेष ड्रोन यूनिट स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने ‘ईगल ऑन एवरी आर्म'(प्रत्येक सैनिक की बांह पर बाज) का कॉन्सेप्ट दिया था, जिसका मतलब है कि हर सैनिक को ड्रोन की क्षमता से लैस किया जाएगा।

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