कम लोग जानते हैं कि हनुमान जी को इलायची अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है. महंतों के अनुसार इसकी सुगंध बजरंगबली को प्रसन्न करती है और मंगल दोष शांत होता है. मंगलवार को इलायची चढ़ाने से मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और रिश्तों की खटास दूर होने का विश्वास है.

हनुमान जी को अक्सर लोग बूंदी, लड्डू या सिंदूर चढ़ाते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इलायची भी उन्हें अर्पित की जाती है. माना जाता है कि इलायची की सुगंध से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

फरीदाबाद के महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और उन्हें खुश करने के पुराने पारंपरिक उपाय हैं. उनके अनुसार इलायची चढ़ाने से ग्रहों का प्रभाव शांत होता है और मन को स्थिरता मिलती है.

ज्योतिष में इलायची का संबंध बुध और शुक्र ग्रह से माना गया है. ऐसे में यह उपाय बुद्धि, वाणी और ऐश्वर्य बढ़ाने वाला माना जाता है. इस वजह से कई लोग मंगलवार को खास तौर पर इलायची चढ़ाने की सलाह देते हैं.

मंगलवार के दिन इलायची अर्पित करने से मंगल दोष का असर कम माना जाता है. इस उपाय से कई लोग मानसिक तनाव, रिश्तों की खटास या क्रोध जैसी दिक्कतों में राहत महसूस करते हैं और जीवन में शांति आने लगती है.

मान्यता है कि इलायची चढ़ाने वाले व्यक्ति के रुके हुए काम आगे बढ़ते हैं. खासकर आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए यह तरीका फायदेमंद माना गया है. इससे धन के नए रास्ते खुलने का विश्वास है और कर्ज जैसी दिक्कतें भी कम हो सकती हैं.

एक साबुत हरी इलायची लें और इसे ताजे पान के पत्ते पर रखें. पान पर चूना या तंबाकू न हो सिर्फ लौंग, इलायची या गुलकंद जैसी चीजें हों. फिर इस बीड़े को हनुमान जी के चरणों में श्रद्धा से अर्पित करें.

अगर मंदिर जाना संभव न हो तो घर के पूजा स्थान में दीपक जलाकर हनुमान जी की प्रतिमा के सामने इलायची रख दें. मान्यता है कि यह उपाय भी उतना ही असरदार होता है और धीरे-धीरे घर में सुख, शांति और बरकत बढ़ती है.

(यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930