वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रहणों का प्रभाव केवल पृथ्वी के मौसम या पर्यावरण पर ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, मानसिक स्थिति, देश-दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा पड़ता है। जवाली के ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने बताया कि पहला सूर्यग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार को लगेगा जोकि यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और रूस के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा लेकिन भारत में यह सूर्य ग्रहण दृश्यमान नहीं होगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा। इस बार का ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में घटित होगा।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण राशि चक्र की तीन प्रमुख राशियों सिंह, धनु और कुंभ के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इन राशियों के त्रिक भाव (छठे, आठवें और बारहवें भाव) सक्रिय हो रहे हैं। ज्योतिष में त्रिक भावों को सामान्यतः अशुभ और संघर्ष का कारक माना जाता है, इसलिए इन तीन राशियों के जातकों को इस अवधि में अपने स्वास्थ्य, करियर और आर्थिक मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक और शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल केवल उसी स्थान पर मान्य होता है जहां वह प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा। पूजा-पाठ, मंदिर के दर्शन और दैनिक शुभ कार्यों पर कोई रोक-टोक नहीं रहेगी। लोग बिना किसी भय या पाबंदी के अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रख सकते हैं।

राशियों पर प्रभाव

भले ही ग्रहण भारत में न दिखे लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्रमा, राहु और केतु की स्थिति का असर सभी राशियों पर पड़ता है। यह समय कुछ राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, तो कुछ को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

1. सिंह राशि: सूर्य ग्रहण सिंह राशि के जातकों के 12वें भाव में लग रहा है, जो व्यय और हानि का प्रतीक है। इस दौरान आपका बजट बिगड़ सकता है। अप्रत्याशित खर्च सामने आ सकते हैं. जो लोग विदेश से संबंधित कार्य या व्यापार से जुड़े हैं, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी होगी। पारिवारिक मोर्चे पर जीवनसाथी के साथ मतभेद हो सकते हैं, इसलिए अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें। सेहत के मामले में अनिद्रा, आंखों की समस्या या सिरदर्द परेशान कर सकता है।

2. धनु राशि: धनु राशि वालों के लिए यह ग्रहण आठवें भाव में पड़ रहा है, जो आयु और अचानक आने वाले संकटों का कारक है. आपके बने-बनाए काम बीच में अटक सकते हैं। इस समय किसी भी बड़े निवेश या कार्यक्षेत्र में जोखिम भरे प्रयोग से बचें। यात्रा के दौरान अपने कीमती सामान का विशेष ध्यान रखें। चोरी का डर बना रह सकता है। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतें।

3. कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातकों के छठे भाव में यह ग्रहण लग रहा है, जिसे रोग और शत्रु का भाव माना जाता है। कार्यस्थल पर गुप्त शत्रु आपके काम में बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें।  सहकर्मियों के साथ विवाद से बचें। कारोबार में कोई भी बड़ा निर्णय जल्दबाजी में न लें। पेट और रक्त से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति सचेत रहें।

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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