कर्नाटक सरकार ने कम सर्कुलेशन वाले नेशनल हेराल्ड को दो वर्षों में सबसे ज्यादा सरकारी विज्ञापन दिए. इसे लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला और करदाताओं के पैसे की लूट का आरोप लगाया. वहीं कांग्रेस ने इसे सही ठहराते हुए बचाव किया.

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार की तरफ से सरकारी विज्ञापनों के बजट का बड़ा हिस्सा कांग्रेस से जुड़े अखबार नेशनल हेराल्ड को दिए जाने की खबर से सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है. खबर है कि कम पाठक संख्या और राज्य में लगभग जीरो सर्कुलेशन के बावजूद नेशनल हेराल्ड को लगातार दो वित्तीय वर्षों में सबसे अधिक सरकारी विज्ञापन दिए गए हैं. CNN-NEWS18 को मिले दस्तावेज़ों ने इस पूरे मामले को उजागर किया है.

इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में कर्नाटक सरकार ने नेशनल हेराल्ड को 1.90 करोड़ रुपये के विज्ञापन दिए. वहीं 2024-25 में यह राशि करीब 99 लाख रुपये रही. हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर के बड़े अखबारों में दिए गए कुल विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा अकेले नेशनल हेराल्ड को मिला. 2024-25 में कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापनों पर कुल 1.42 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें से 69 फीसदी रकम सिर्फ नेशनल हेराल्ड को दी गई. कई बड़े और ज्यादा सर्कुलेशन वाले राष्ट्रीय अखबारों को या तो इससे आधी राशि भी नहीं मिली या उन्हें कोई विज्ञापन नहीं दिया गया.

कम सर्कुलेशन, ज्यादा सरकारी मेहरबानी

इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस अखबार का कर्नाटक में न के बराबर सर्कुलेशन है और जिसकी दिल्ली में भी बेहद सीमित मौजूदगी है, उसे राज्य सरकार इतनी बड़ी राशि क्यों दे रही है. विपक्ष का आरोप है कि यह जनहित में सूचना प्रसार नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से जुड़े एक प्रकाशन को आर्थिक सहारा देने की कोशिश है.

आलोचकों का कहना है कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल जनता तक सरकारी योजनाएं पहुंचाने के बजाय एक पार्टी से जुड़े अखबार को बचाने में किया जा रहा है.

बीजेपी का हमला

इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला है. कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता डॉ. सीएन अश्वथ नारायण ने इसे ‘करदाताओं के पैसे की खुली लूट’ करार दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अखबार की राज्य में कोई खास पाठक संख्या ही नहीं है, उसे सरकारी विज्ञापन क्यों दिए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नेशनल हेराल्ड पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में है.

डॉ. अश्वथ नारायण ने कहा, ‘जिस अखबार का कर्नाटक या देश में कोई वास्तविक सर्कुलेशन नहीं है, उसे सरकारी पैसा क्यों दिया जा रहा है? और ऐसे संस्थान को सरकारी फंड क्यों दिया जाए, जो पहले से गंभीर आर्थिक जांचों का सामना कर रहा है?’

बीजेपी ने सिद्धारमैया सरकार से विज्ञापन आवंटन के मानकों को सार्वजनिक करने और पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की है.

कांग्रेस का पलटवार

वहीं कांग्रेस इस पूरे विवाद में आक्रामक बचाव के मूड में है. राज्य के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड को विज्ञापन देने में ‘कुछ भी गलत नहीं’ है.

खंड्रे ने सवाल उठाया, ‘नेशनल हेराल्ड को विज्ञापन देने में क्या गलत है?’ उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सवाल उठाना ‘राष्ट्र-विरोधी’ मानसिकता को दर्शाता है, जिससे विवाद और बढ़ गया.

वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने CNN-NEWS18 से बातचीत में नेशनल हेराल्ड को ‘राष्ट्रीय धरोहर’ बताते हुए इसका बचाव किया. उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से यह अखबार देश के इतिहास का हिस्सा रहा है और ऐसी संस्थाओं की रक्षा करना देश की जिम्मेदारी है. पवन खेड़ा ने कहा, ‘नेशनल हेराल्ड आज़ादी के समय से एक राष्ट्रीय धरोहर है. अगर मीडिया को ही फंड दिया जा रहा है, तो इसमें दिक्कत क्या है?’

नेशनल हेराल्ड को लेकर कर्नाटक में यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब पहले से ही राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं. अब सवाल यह है कि क्या सरकार विज्ञापन नीति पर पारदर्शिता दिखाएगी या यह मामला भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा.

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