बांसवाड़ा – केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलने और इसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी जन आंदोलन की शुरुआत की है, जिसके तहत आगामी 45 दिनों तक भाजपा सरकार के खिलाफ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर शनिवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ता रैली के रूप में आंबेडकर सर्किल पहुंचे और वहां अनशन किया।
कार्यकारी अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार ने कहा कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया था। यह योजना प्रतिवर्ष 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराती है, पलायन को रोकती है। लेकिन भाजपा सरकार ने इसे बदलकर गांधीजी का नाम हटाया है, जो पूरे देश का अपमान है।

वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर बढ़ा – लालसिंह झाला
पीसीसी प्रभारी लालसिंह झाला ने कहा कि वर्तमान में मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है और किए गए कार्य का भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा है। इसके चलते मजदूरों को अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है।
नया अधिनियम, काम की वैधानिक गारंटी समाप्त करता है। निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण करता है, ग्राम सभा और पंचायत को कमजोर करता है। केंद्र का मजदूरी अंशदान 90 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर देता है। इससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर बढ़ गया है।
मनरेगा बचाव संग्राम जन आंदोलन के तहत होंगे कई कार्यक्रम
कांग्रेस ने घोषणा की कि मनरेगा बचाव संग्राम जन आंदोलन के तहत आने वाले समय में विभिन्न स्तरों पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनशन के दौरान पीसीसी सचिव दिनेश श्रीमाली, कृष्णपाल सिंह सिसोदिया, केशवचंद्र निनामा, धर्मेंद्र तेली, नवाब फौजदार, देवबाला राठौड़, प्रज्ञा शाश्वत, गरासिया सुभाष निनामा, शामदाद खान, शाहरुख खान, आसिफ मुस्तफा, सुरेश कलाल, गायत्री खाट आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।














