ईरान में अब बगावत या विद्रोह नहीं, बल्कि नरसंहार जारी है। एक आंकड़ा है कि अभी तक करीब 650 मौतें हो चुकी हैं, जबकि पश्चिमी मीडिया 6000 से अधिक मौतों की खबर दे रहा है। कथित ‘क्रांतिवीर’ इरफान को फांसी की सजा सुनाई गई है। ईरानी पुलिस ने 11,000 से अधिक विद्रोहियों को गिरफ्तार किया है अथवा हिरासत में रखा है। सडक़ों पर 15-18 लाख विद्रोही आंदोलित हैं। लोग जिंदा जलाए जा रहे हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गाड्र्स के एक कर्नल की विद्रोहियों ने हत्या कर दी है। मस्जिदें, बैंक, सरकारी इमारतें, पुलिस स्टेशन जलाए गए हैं। गवर्नर आवास भी आगजनी का शिकार हुआ है। ईरानी हुकूमत ने विद्रोहियों को देखते ही गोली मार देने के आदेश जारी किए हैं। विद्रोहियों को ‘सजा-ए-मौत’ भी दी जा सकती है। इन ऐलानों के बावजूद लाखों युवाओं के हुजूम सुप्रीम धार्मिक नेता खामेनेई का तख्तापलट करने पर आमादा हैं। सडक़ों पर खामेनेई समर्थक भी फैल गए हैं। आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक पतन, ढहती मुद्रा रियाल आदि के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब उसने अंतरराष्ट्रीय रूप ले लिया है। अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप लगातार ईरानी हुकूमत को धमका रहे हैं कि कभी भी हमला किया जा सकता है। एक ओर अमरीका है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ रूस, चीन सरीखी महाशक्तियां हैं। बीच में खबर आई थी कि खामेनेई अपने परिवार और घोर समर्थक 20 लोगों के साथ मॉस्को भाग सकते हैं, लेकिन वह अब भी ईरान के बेहद सुरक्षित ठिकाने के भीतर हैं और बेहद घातक बल के जवान उनकी सुरक्षा में मोर्चाबंद हैं। ईरान वेनेजुएला नहीं है, लिहाजा टं्रप किसी मुगालते में न रहें। ईरान एक ताकतवर और प्रशिक्षित सेना वाला देश है। उसके पास परमाणु सम्मत मिसाइल भी है, जिसका एक चित्र मीडिया में दिखाया गया था। ईरान ने ऐलान किया है कि यदि अमरीका ने हमला किया, तो ईरान अपने आसपास के 19 अमरीकी बेसों पर हमला कर उन्हें तबाह कर देगा।

लिहाजा राष्ट्रपति टं्रप जरा खुद को संयमित रखें और दूसरे देशों को हड़पने की रणनीति फिलहाल शांत कर दें, क्योंकि उनके टैरिफवाद पर सुप्रीम अदालत का फैसला आने वाला है और अमरीका में ही सैकड़ों शहरों में टं्रप-विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। लोकतंत्र में जनता का हुजूम कोई भी करवट ले सकता है। सत्ताएं पलट जाती हैं। बेशक ईरान बहुत तेजी से विपन्नता की ओर बढ़ा है। जनवरी, 2026 में ही वहां की खाद्य मुद्रास्फीति 70-85 फीसदी तक उछल चुकी है। एक डॉलर की कीमत 14.20 लाख ईरानी रियाल हो गई है। गरीबी दर करीब 40 फीसदी है और देश की विकास दर मात्र 0.6 फीसदी है। खाने-पीने की चीजें दुर्लभ हो गई हैं। भारत के संदर्भ में देखें, तो वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों का आपसी कारोबार करीब 1.68 अरब डॉलर रहा। भारत को करीब 0.80 अरब डॉलर का व्यावसायिक लाभ हुआ। भारत ईरान को चावल, चीनी, चाय, दवाइयां, इलेक्ट्रोनिक मशीनरी, कृत्रिम फाइबर आदि निर्यात करता है, जबकि ईरान से सूखे मेवे, रसायन, कांच से बने उत्पाद भारत को भेजे जाते हैं। ईरान सबसे अधिक कच्चा तेल आपूर्ति वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। यदि ईरान संकट का असर होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंचता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी। दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा हो सकता है। यही नहीं, ईरान की चाबहार बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक सीधा व्यापारिक रास्ता देती है। यदि ईरान में अस्थिरता बढ़ती है और चाबहार बंदरगाह प्रभावित, बाधित होती है, तो भारत की भू-आर्थिक रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है।

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