तिरुवनंतपुरम : केरल हाई कोर्ट ने ऐसे मामले में एक छात्रा के हक में फैसला सुनाया है, जिसे जानकर आप हैरान नहीं, बल्कि खुश होंगे। केरल में स्टेट लेवल कलोसवम के लिए जिलों में कॉम्पिटिशन के दौरान छात्रा के नृत्य प्रदर्शन के दौरान बिजली चली गई थी। पांचवीं पोजिशन मिलने के कारण शिक्षा विभाग के जजों ने छात्रा को स्टेट लेवल में एंट्री नहीं दी। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसे 14 जनवरी से शुरू हो रहे स्टेट लेवल कॉम्पिटिशन में शामिल होने का मौका मिल गया है।

लाइट जाने के बाद भी डांस करती रही छात्रा

यह मामला तिरुवनंतपुरम जिला स्कूल का है। 16 साल की स्टूडेंट ने कुचिपुड़ी (गर्ल्स) कैटिगरी में पार्टिसिपेट किया था। जिला स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता के दौरान जब छात्रा स्टेज पर परफॉर्म कर रही थी, तब अचानक लाइट चली गई। इस कारण म्यूजिक भी बंद हो गया। इस दौरान छात्रा ने बिना म्यूजिक और लाइट के मंच पर डांस करना जारी रखा। करीब 32 सेकेंड के बाद लाइट आई तो उसका समय खत्म हो चुका था। जजों ने उसे दोबारा परफॉर्म करने का मौका नहीं दिया। इस कॉम्पिटिशन में वह पांचवीं स्थान पर रही, इस कारण उसे स्टेट लेवल परफॉर्मेंस के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। छात्रा ने इस मूल्यांकन से असंतुष्ट होकर शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई। उसने कहा कि बिजली जाने के कारण उसके प्रदर्शन पर असर पड़ा और उसे पहला स्थान मिलना चाहिए था।

32 सेकेंड के लिए अचानक गुल हुई थी लाइट

शिक्षा विभाग ने उसे बताया कि कि बिजली सिर्फ 32 सेकंड के लिए गई थी और इससे उसके प्रदर्शन पर कोई खास असर नहीं पड़ा। विभाग ने स्कोर शीट, स्टेज मैनेजर की रिपोर्ट, वीडियो और मूल्यांकन शीट की जांच के बाद कहा कि छात्रा का प्रदर्शन पहले स्थान पर रहने वाली स्टूडेंट जितना अच्छा नहीं था। शिक्षा विभाग के इस फैसले नाखुश छात्रा ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका देने की गुहार लगाई। उसके वकील राजेश कन्नन और प्रवीण एन पिल्लई ने कोर्ट में दलील दी कि बिजली गुल होने जैसी तकनीकी खराबी के कारण छात्रा का मनोबल और आत्मविश्वास कम हो गया होगा, जिसका सीधा असर उसके प्रदर्शन पर पड़ा। उन्होंने कहा कि छात्रा को दोबारा प्रदर्शन का मौका न देना गलत था।

कोर्ट ने माना, दोबारा परफॉर्मेंस का मौका देना चाहिए था

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच ने माना कि परफॉर्मेंस के दौरान बिजली जाने जैसी घटना से छात्रा का आत्मविश्वास कम हो सकता था, जिससे उसका प्रदर्शन प्रभावित हुआ होगा। इसके बावजूद उसने डांस करना जारी रखा था। कोर्ट ने कहा कि भले ही छात्रा को जिला स्तर पर पांचवां स्थान मिला हो, लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि उसकी परफॉर्मेंस पर इस तकनीकी खराबी का असर पड़ा हो। छात्रा को निष्पक्ष मौका मिलना चाहिए था, इसलिए उसे राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलना चाहिए। कोर्ट के फैसले के बाद छात्रा को स्टेट लेवल कलोसवम में कुचिपुड़ी (गर्ल्स) की जनरल कैटेगरी में भाग लेने की अनुमति मिल गई है।

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