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पटना. राजनीति में पद, जिम्मेदारियां और भूमिकाएं बदलती रहती हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो समय और परिस्थितियों से ऊपर बने रहते हैं. मकर संक्रांति के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के आवास पर पहुंचना और दही-चूड़ा भोज में शामिल होना इसी परंपरा का एक सशक्त उदाहरण माना जा रहा है. यह मुलाकात किसी राजनीतिक बयान या मंच साझा करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें वर्षों पुराने रिश्तों, आपसी सम्मान और राजनीतिक संस्कारों की झलक साफ दिखाई दी. इस दौरान नीतीश कुमार और नितिन नबीन की जो तस्वीरें सामनें आई उसे देखकर लोग यह कह रहे हैं कि राजनीति में आज भी व्यक्तिगत और पुराने रिश्तों की बड़ी भूमिका होती है.

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है. उन्होंने उस दौर से नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में काम किया, जब प्रशासनिक दक्षता, अनुशासन और विकास कार्यों को सरकार की पहचान माना जाता था. नितिन नबीन को केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि ऐसे नेता के रूप में देखा जाता था जो नीतीश कुमार की कार्यशैली से सीखते हुए आगे बढ़ रहे थे. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम रही है कि नितिन नबीन के लिए नीतीश कुमार सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और अभिभावक-समान रहे हैं.

वक़्त के साथ नितिन नबीन की जिम्मेदारियां बदलीं और आज वे बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एक अहम भूमिका में हैं. 19 तारीख को राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन करेंगे. इससे पहले, नीतीश कुमार का उनके आवास पर पहुंचना और उसी पुराने संबंधों को निभाना बताता है कि व्यक्तिगत रिश्तों का सम्मान बना रहता है. यह मुलाकात खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इसमें कोई औपचारिकता नहीं थी. न मंच, न भाषण- सिर्फ परंपरा, अपनापन और आपसी सम्मान. यही कारण है कि इस मुलाकात को देखकर यह संदेश गया कि राजनीति में आगे बढ़ने का मतलब पुराने संबंधों को पीछे छोड़ देना नहीं होता.

मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज बिहार की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा है. राजनीति में यह परंपरा वर्षों से एक ऐसा अवसर रही है, जहां वरिष्ठ और कनिष्ठ नेता बिना किसी औपचारिक एजेंडे के मिलते हैं. नीतीश कुमार का नितिन नबीन के घर पहुंचना इसी सांस्कृतिक परंपरा की एक झलक के रूप में देखी जा रही है. यह दृश्य इस बात की याद दिलाता है कि बिहार की राजनीति में अब भी संस्कार और परंपराएं जीवित हैं, जहां पद से ज्यादा व्यक्ति और रिश्ते मायने रखते हैं.

राजनीति में गुरु-शिष्य की परंपरा अब कम ही देखने को मिलती है, लेकिन नीतीश कुमार और नितिन नबीन के रिश्ते को इसी नजरिए से देखा जाता रहा है, जिस नीतीश कुमार के साथ काम करते हुए नितिन नबीन ने राजनीतिक अनुभव हासिल किया, आज उसी व्यक्ति के सामने वे एक परिपक्व और अनुभवी नेता के रूप में खड़े हैं. इस मुलाकात में न तो शक्ति प्रदर्शन था और न ही तुलना, बल्कि था तो सिर्फ एक वरिष्ठ नेता और उसके पूर्व सहयोगी के बीच का सहज संवाद.

इस पूरे कार्यक्रम की तस्वीरों ने बिना किसी बयान के बहुत कुछ कह दिया. नीतीश कुमार का सादगीपूर्ण अंदाज, नितिन नबीन का सम्मानभाव और पारिवारिक माहौल ये सब मिलकर यह बताते हैं कि राजनीति में चाहे पद बदलते रहे भावनात्मक रिश्ते और सम्मान बने रह सकते हैं.

मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि यह राजनीतिक संवाद का अनौपचारिक मंच भी माना जाता है. इस मंच पर औपचारिक बयान नहीं होते, लेकिन तस्वीरों और मुलाकातों के जरिए बड़े संदेश दिए जाते हैं. नीतीश कुमार की मौजूदगी यह संकेत देती है कि एनडीए के साथ उनके मजबूत संबंध हैं. वहीं नितिन नबीन की भूमिका यह दिखाती है कि अब वे केवल बिहार के नेता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के एक अहम चेहरा बन चुके हैं.

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