डॉ. रोहित यादव द्वारा ध्वजारोहण, नवाचार और नये
लक्ष्यों पर सफलता के लिए विद्युत कर्मियों की सराहना
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रायपुर -छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कम्पनीज मुख्यालय डंगनिया में प्रदेश के ऊर्जा सचिव तथा पॉवर कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने ध्वजारोहण किया तथा अपना उद्बोधन दिया। इस अवसर पर डॉ. यादव ने कहा कि ई-ऑफिस और बायोमेटिक अटेण्डेंस प्रणाली को जिस तेजी और कुशलता के साथ छत्तीसगढ़ में लागू किया गया है, वह सराहनीय है। ई-ऑफिस के माध्यम से तीनों पॉवर कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता आई है। मैं चाहूंगा कि ई-फाइलिंग प्रणाली को निचले स्तरों तक आगे बढ़ाया जाये और इसके माध्यम से विभिन्न कार्यालयों की दक्षता और कार्यकुशलता के लिए स्वस्थ प्रतियोगिता शुरू की जाये। ई-ऑफिस में सर्वश्रेष्ठ कार्य-निष्पादन करने वाले कार्यालय को रनिंग ट्राफी प्रदान की जायेगी। उन्होंने बहुत सारे नवाचारों में अपने को ढालने और नये लक्ष्यों की पूर्ति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने हेतु तारीफ की। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की देश के अन्य राज्यों के बीच रैंकिंग में सुधार और ‘बी‘ से ‘ए‘ ग्रेड हासिल करने पर उन्होंने वितरण कंपनी के अच्छे कार्यों का परिणाम बताया और लक्ष्य दिया कि हमें ‘ए प्लस‘ ग्रेड हासिल करके देश की सर्वश्रेष्ठ पॉवर कंपनियों में शुमार होना है।
डॉ. यादव अपने उद्बोधन में ने कहा कि पिछले दिनों हमने तीनों कंपनियों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए जो नये पैमाने बनाये थे, नये लक्ष्य रखे थे। उन्हें बहुत हद तक पूरा करने में हम सफल हुए हैं। हमने ‘‘ई-ऑफिस‘‘ को कारगर ढंग से शुरू और संचालित कर लिया है। मुख्यालय स्तर पर ‘‘बायोमैट्रिक अटेण्डेन्स सिस्टम‘‘ शुरू कर लिया गया है, जिसे क्रमशः अन्य कार्यालयों में भी लागू किया जायेगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत भी दो महत्वपूर्ण नवाचार किये गये है। कोरबा जिले के ग्राम गुडरूमुड़ा में विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ सोलर रूफटॉप संयंत्र भी निःशुल्क दिये गये है। हमारा यह पायलट प्रोजेक्ट देश में अग्रणी है। इसी तरह रायपुर में ही फ्लैट में रहने वाले लोगों के लिए वर्चुअल नेट मीटरिंग का सफल प्रयोग किया गया है। हमने अलग-अलग विभागों के लिए कुछ लक्ष्य दिये थे जिसे आप लोगों ने पूरा किया। इससे मेरे मन में यह विश्वास भी मजबूत हुआ है कि आप लोग रिफॉर्म, नई प्रणालियों को अपनाने को तत्पर रहते हैं। इस सकारात्मक रूख के लिए मैं आप सभी की सराहना करता हंू।
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वित्तीय वर्ष के 9 महीनों में हमारे ताप बिजलीघरों का पीएलएफ लगभग 75 प्रतिशत रहा है जो देश के सभी राज्यों में तीसरे स्थान पर है। सिर्फ दिसम्बर माह में 87 प्रतिशत से अधिक पीएलएफ दर्ज करने का नया कीर्तिमान भी स्थापित किया गया है।
हर्ष का विषय है कि हमारी पॉवर कंपनी 660-660 मेगावाट के सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर स्टेशन की दो इकाइयां स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। पर्यावरण सम्मत जल विद्युत क्षमता बढ़ाने के लिए हम अभी तक 6 स्थानों पर 8 हजार 300 मेगावाट क्षमता के पंप स्टोरेज आधारित हाइडल पॉवर प्रोजेक्ट के एमओयू कर चुके हैं जिसमें से 5 का साध्यता प्रतिवेदन मिल गया है तथा डीपीआर बनाने का काम प्रगति पर है। मड़वा के बिजलीघर परिसर में 300 किलोवाट का रूफटाप सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किया गया है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज सोलर पॉवर प्लांट, फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट स्थापित करने के दिशा में भी हम आगे बढ़ रहे है।

माननीय मुख्यमंत्रीजी ने छत्तीसगढ़ को ऊर्जा उत्पादन की राष्ट्रीय राजधानी के रूप में विकसित करने की मंशा प्रकट की है। जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पहली बार परमाणु ऊर्जा आधारित बिजलीघर की स्थापना की पहल भी की गई है। बिजली उत्पादन के विभिन्न विकल्पों को समाहित करते हुए राज्य शासन के अतिरिक्त विभिन्न संस्थाओं को भी भागीदार बनाया गया है। जिससे भविष्य में छत्तीसगढ़ में लगभग 38 हजार मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उत्पादन हो।

बिजली के उत्पादन तथा उपलब्धता में वृद्धि के साथ पारेषण क्षमता में विस्तार की दूरदर्शी सोच आवश्यक होती है। छत्तीसगढ़ में इसी दूरदर्शिता के साथ पारेषण अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। पारेषण प्रणाली में ट्रांसफार्मरों की क्षमता 27 हजार 883 एम.वी.ए., पारेषण लाइनों की लंबाई 14 हजार 730 सर्किट किलोमीटर तक पहंुचना तथा केन्द्रीय ग्रिड से पॉवर हस्तांतरण की क्षमता 4 हजार 930 मेगावाट तक पहंुच जाना हमारे सतत् प्रयासों का परिणाम है। इन्हीं वजहों से प्रदेश की पारेषण हानि जो कि वर्ष 2024-25 में 3.29 प्रतिशत थी वह घट कर राज्य नियामक आयोग द्वारा निर्धारित लक्ष्य 3 प्रतिशत के मुकाबले सितम्बर 2025 तक 2.74 प्रतिशत दर्ज की गई है। उपलब्धता सूचकांक निर्धारित लक्ष्य 99 प्रतिशत के मुकाबले 99.77 प्रतिशत आ गया है। नये लक्ष्यों की ओर देखें तो अति उच्च दाब के 71 उपकेन्द्रों में से 4 का निर्माण पूरा हो गया है तथा 67 का कार्य विभिन्न चरणों पर प्रगति पर है जो समय पर पूरा किया जायेगा।
प्रदेश में विद्युत प्रदाय की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में लगातार बढ़ोत्तरी के कारण ही उपभोक्ताओं की संख्या विगत 25 वर्षों में साढ़े 3 गुना बढ़ गई है। वहीं बिजली की मांग 5 गुना से अधिक बढ़ कर 7 हजार 6 मेगावाट दर्ज की गई। इस तरह अब 65 लाख 60 हजार 184 उपभोक्ताओं की सेवा और संतुष्टि हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है और लक्ष्य भी है। भौगोलिक विस्तार और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुपात में वितरण अधोसंरचना में कई गुना विस्तार किया गया है। विगत दो वर्षों में वितरण कंपनी ने 28 नये मैदानी कार्यालय शुरू किये हैं।
हमारी वितरण कंपनी ने शत-प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण कर लिया है और अब मजरा-टोला के साथ, हर घर में बिजली पहूंचाने के लिए पूरे समर्पण से कार्य कर रही है। 13 हजार 500 मजरा-टोलां, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी महान्याय अभियान (पीएम जनमन) के तहत अत्यंत पिछड़ी जनजातियों के 7 हजार 160 घरों, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 4 हजार 991 घरों तथा नियद नेल्लानार योजना के तहत 14 हजार 805 घरों में बिजली पहंुचा दी गई है। बचे हुए मजरा-टोलों और घरों में भी बिजली पहूंचाने को प्राथमिकता दी गई है। इसी के साथ भारत सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं पर हम पूरा ध्यान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, कुसुम योजना, स्मार्ट मीटरिंग योजना ऐसी राष्ट्रीय पहल हैं जो बहुत ही व्यापक तौर पर पर्यावरण सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों, सार्वजनिक धन की बचत, पारदर्शिता और आम बिजली उपभोक्ता के हित में है। मैं चाहंूगा कि आप सब लोग सौर ऊर्जा और स्मार्ट मीटरिंग के ब्रांड एम्बेसेडर बनें। यह जुड़ाव आपके विभागीय दायित्वों के अलावा ‘‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय‘‘ की भावनाओं से ओतप्रोत होने के कारण आपके जीवन को भी सार्थकता प्रदान करेगा।
कर्मचारी हित को प्रबंधन ने सदैव अपनी जिम्मेदारी माना है और यथासमय सकारात्मक फैसले लेते रहे हैं। हमने सेवाओं का सम्मान करते हुये पदोन्नति प्रक्रिया को सुगम बनाया है और इसका लाभ भी बड़े पैमाने पर दिया है। इसी क्रम में अब लाइन परिचारकों का मानदेय 33 प्रतिशत बढ़ाया गया और उन्हें पहली बार पेट्रोल भत्ता देने का निर्णय भी लिया गया है।

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