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भारतीय बाजार में आने वालो दिनों में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, लेम्बॉर्गिनी, पोर्श और ऑडी जैसी प्रीमियम लग्जरी यूरोपीय कारें सस्ती हो सकती हैं। दरअसल, भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मंगलवार को हुए व्यापार समझौता (एफटीए) में कोटा-आधारित रियायतें देने के फैसले के बाद कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। यह समझौता साल 2027 से लागू हो सकता है। भारत-ईयू द्विपक्षीय व्यापार समझौते में जहां ईयू भारतीय ऑटोमोबाइल्स पर शुल्क को अलग-अलग चरणों में समाप्त करेगा। वहीं, भारत कुछ तय संख्या (कोटा) के अंतर्गत आयात शुल्क घटाकर 10 फीसदी तक लाएगा। इटली की कार निर्माता कंपनी लेम्बॉर्गिनी को इस समझौते से अच्छा-खासा फायदा होने की उम्मीद है।

लेम्बॉर्गिनी भारत में करीब 3.8 करोड़ रुपए से शुरू होने वाली कीमतों पर कारें बेचती है और अपने सभी मॉडल आयात करती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में भारत ने अपनी घरेलू ईवी इंडस्ट्री को पहले पांच साल तक सुरक्षा दी है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुल्क रियायतें समझौते के पांचवें साल से शुरू होंगी और अलग-अलग सेगमेंट में 30-35 प्रतिशत से शुरू होकर धीरे-धीरे घटेंगी। फिलहाल, 40,000 डॉलर से कम कीमत की आयातित कारों पर भारत में 70 फीसदी, और इससे महंगी कारों पर 110 फीसदी तक प्रभावी आयात शुल्क लगता है।

यूरोपीय कार कंपनियों की थी नजर

यूरोपीय कार मैन्युफेक्चरर और भारतीय उपभोक्ता इस समझौते की प्रगति पर लंबे समय से नजर बनाए हुए थे। साल 2007 में शुरू हुई बातचीत, ऑटो सेक्टर में शुल्क में रियायत देने को लेकर मतभेदों के कारण 2013 में रुक गई थीं। भारत का ऑटो सेक्टर तेजी से मजबूत हो रहा है और इसी कारण भारत अब एफटीए के अंतर्गत सीमित और नियंत्रित तरीके से शुल्क रियायतें दे रहा है। इससे पहले भी भारत ने ब्रिटेन की कार कंपनियों को कोटा-आधारित रियायतें दी हैं।

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