बारामती विमान दुर्घटना ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर अचानक अलग परिस्थितियां पैदा कर दीं हैं. इस हादसे के बाद नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) में उत्तराधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी अजीत पवार के नेतृत्व में मजबूत होती दिख रही थी.
हाल के सालों में अजीत पवार NCP के अंदर एक प्रमुख पावर सेंटर के रूप में उभरे थे. महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में उनके गुट के प्रदर्शन – जहां पार्टी ने 760 सीटें हासिल कीं – और राज्य विधानसभा में 41 NCP विधायकों के बीच उनकी स्थिति ने संगठन पर उनकी पकड़ को मजबूत किया था. NDA के साथ गठबंधन करने और उपमुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद, पवार का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा था, और पार्टी कार्यकर्ता और दूसरी पंक्ति के नेता उन्हें शरद पवार की विरासत का असली वारिस मानने लगे थे.
इस दुखद घटना का समय राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. हाल के सालों में NCP गुटों के बीच संभावित सुलह पर आंतरिक चर्चाएं कई बार सामने आई थीं. बैठकें हुईं और बैक-चैनल बातचीत का भी दावा किया गया. इन सबके बावजूद अजीत पवार का अपने खेमे में अधिकार काफी हद तक निर्विवाद हो गया था.
NCP का भविष्य क्या?
उनके निधन के बाद मुख्य सवाल यह है कि संगठन और विधायी ताकत दोनों, कौन संभालेगा?
एक संभावना सुप्रिया सुले हैं, जो वरिष्ठ NCP नेता और शरद पवार की बेटी हैं. उनके पास राष्ट्रीय पहचान, संसदीय अनुभव और मूल पार्टी संरचना के कुछ वर्गों में स्वीकार्यता है. बदलाव के इस दौर में, उन्हें एक सर्वसम्मत चेहरे के रूप में पेश किया जा सकता है जो संगठन को स्थिर कर सके और गुटों के बीच बातचीत का प्रबंधन कर सके. निगम चुनावों के दौरान अजित और सुप्रिया ने एक साथ मंच साझा किया था.
अटकलों का दूसरा केंद्र पवार परिवार की अगली पीढ़ी, खासकर अजीत पवार के बेटे, पार्थ पवार और जय पवार के इर्द-गिर्द है. फिलहाल NCP की तात्कालिक प्राथमिकता संगठनात्मक स्थिरता है. एनसीपी में गुटबाजी को रोकना, विधायकों को एक साथ रखना, और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर अपनी स्थिति मजबूत रखने की कोशिश करनी होगी. आने वाले दिनों में लिए गए नेतृत्व के फैसले यह तय करेंगे कि आगे क्या होगा?














