नई दिल्ली. आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने उनकी ओर से दायर 2 करोड़ रुपये मानहानि याचिका को खारिज कर दिया है. यह फैसला जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की सिंगल बेंच ने सुनाया. इससे पहले, पिछले साल 2 दिसंबर को कोर्ट ने इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अब अंतिम आदेश जारी किया गया है. नेटफ्लिक्स की यह सीरीज शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ने क्रिएट, को-राइट और डायरेक्ट की है. साल 2021 में एनसीबी की क्रूज ड्रग्स रेड के दौरान आर्यन खान को समीर वानखेड़े ने गिरफ्तार किया था. हालांकि, बाद में 2022 में एनसीबी ने जांच के बाद आर्यन खान समेत पांच अन्य लोगों को क्लीन चिट दे दी थी, जिसके बाद यह मामला कानूनी रूप से उनके खिलाफ आगे नहीं बढ़ा.
समीर वानखेड़े ने यह याचिका नेटफ्लिक्स और रेड चिलीज प्रोडक्शन के खिलाफ दायर की थी. उनका आरोप था कि आर्यन खान से जुड़ी वेब सीरीज ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में उनके चरित्र को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. इसी आधार पर उन्होंने 2 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने की मांग की थी.
समीर वानखेड़े का क्या था दावा
समीर वानखेड़े ने दावा किया था कि आर्यन खान द्वारा डायरेक्ट की गई इस सीरीज में उनके कैरेक्टर को नकारात्मक तरीके से दिखाया गया है, जो 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस से जुड़ा है. उस केस में वानखेड़े ने आर्यन खान को गिरफ्तार किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि सीरीज में एक फिक्शनल नारकोटिक्स ऑफिसर के जरिए उनकी और एंटी-ड्रग एजेंसियों की छवि खराब की गई है, जिससे उनके परिवार को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. वानखेड़े ने सीरीज के कुछ सीन हटाने और स्थायी रोक लगाने की मांग की थी.
कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनकर खारिज की याचिका
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तुत तथ्यों और तर्कों के आधार पर मानहानि का स्पष्ट मामला स्थापित नहीं होता. अदालत के इस फैसले से समीर वानखेड़े को कानूनी मोर्चे पर झटका लगा है, जबकि नेटफ्लिक्स और रेड चिलीज प्रोडक्शन को राहत मिली है. गौरतलब है कि यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब वेब सीरीज के स्ट्रीम होने के बाद ही वानखेड़े ने आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि सीरीज में उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को लेकर भ्रामक संकेत दिए गए हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है. अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह विवाद कानूनी तौर पर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.














