वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निरंतर नौवां बजट लोकसभा में पेश किया है। देश की महिला वित्त मंत्री और यह निरंतरता…वाकई एक कीर्तिमान है। 2026-27 के बजट में क्या प्रावधान किए गए हैं, किसके हिस्से, कितनी राशि आवंटित की गई है, विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के क्या अंतर्विरोध और खामियां हैं, करीब 378 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था में आम आदमी कितना सम्पन्न है, उसकी जेब में कितना पैसा है, इनमें से कुछ विसंगतियों का विश्लेषण आज कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट देश के सामने है, लेकिन हम पहले कुछ बुनियादी सवाल उठा रहे हैं। बेशक हम चौथी आर्थिक महाशक्ति हैं, लेकिन भारत में आज भी प्रति व्यक्ति आय 2.34 लाख रुपए सालाना क्यों है? और देश विश्व में 140वें स्थान पर क्यों है? बीते पांच साल में हमारा निर्यात क्यों नहीं बढ़ रहा है और आयात का बोझ बढ़ता जा रहा है? नतीजतन 2024-25 में व्यापार घाटा 24 लाख करोड़ रुपए है। बीते 10 सालों के दौरान विदेशी निवेश में गिरावट क्यों जारी है? ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 में विदेशी निवेश 9730 करोड़ रुपए था, जो 63 फीसदी कम हुआ है। घरेलू बड़ी कंपनियां भी अपने देश में निवेश बहुत कम कर रही हैं, जबकि विदेशों में उनका निवेश 14 अरब डॉलर से बढ़ कर 24 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। कारपोरेट का यह नकारात्मक रुख क्यों है? ‘आर्थिक सर्वेक्षण’ में हमारी जीडीपी की विकास दर 6.8 फीसदी से 7.2 फीसदी का अनुमान दिया गया है, लेकिन डॉलर की तुलना में हमारी मुद्रा ‘रुपए’ का अवमूल्यन देखें, तो यह विकास दर मात्र 1.5 फीसदी बनती है। क्या इसी आधार पर भारत 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बन सकता है? हमारे 11 बड़े राज्यों पर अभूतपूर्व कर्ज है और देश पर भी कर्ज का बोझ करीब 225 फीसदी बढ़ गया है, नतीजतन प्रत्येक भारतीय पर औसतन 4.8 लाख रुपए का कर्ज है। अर्थव्यवस्था की कौन-सी गुलाबी तस्वीर पेश की जा रही है? कुछ और तथ्य गौरतलब हैं। एक साल में देश की आईटी की 5 प्रमुख कंपनियों में मात्र 17 नौकरियां दी गई हैं। बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी की जो दरें हमारे सामने आती हैं, वे सरकारी और अद्र्धसत्य हैं। देश में करीब 1.20 करोड़ गिग वर्कर्स कार्यरत हैं।

उनमें से 40 फीसदी औसतन 15,000 रुपए माहवार ही कमा पाते हैं। यानी 500 रुपए प्रतिदिन…न्यूनतम दिहाड़ी से भी कम…! बीमा क्षेत्र दुनिया में सबसे निचले स्तर पर है, क्योंकि लोग बीमे को लेकर जागरूक ही नहीं हैं और देश में बीमा बहुत महंगा है। बहरहाल वित्त मंत्री ने बजट में कुछ अहं घोषणाओं, योजनाओं, कारिडोर, पार्क संबंधी प्रस्ताव रखे हैं। उनमें विकास पर सरकारी पूंजीगत व्यय के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपए का रिकार्ड आबंटन किया गया है। सरकार ने ग्लोबल बायो फार्मा हब और सेमीकंडक्टर मिशन के लिए क्रमश: 10,000 और 40,000 करोड़ रुपए तय किए हैं। ये मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण है। हालांकि जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान घटकर 12-13 फीसदी तक आ गया है, लेकिन बजट में ‘चैम्पियन एमएसएमई’ के निर्माण की बात कही गई है। सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों के बढ़ावे और विस्तार के लिए 10,000 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए 2000 करोड़ रुपए का टॉप अप भी घोषित किया गया है। बजट में दुर्लभ अर्थ खनिजों, 7 हाईस्पीड रेल के कॉरिडोर और 20 नए जलमार्गों के जरिए बुनियादी ढांचे को संबोधित किया गया है। मेगा टेक्सटाइल पार्क, राष्ट्रीय फाइबर योजना, केमिकल पार्क से लेकर हर शहर पर 5000 करोड़ रुपए खर्च करने तक की घोषणाएं की गई हैं। चिकित्सा और धार्मिक पर्यटन की भी योजनाएं हैं। हर जिले में अस्पताल और महिला छात्रावास होगा। 2026-27 के दौरान वित्तीय घाटा जीडीपी के 4.3 फीसदी तक रह सकता है। बजट में दावा किया गया है कि 10 सालों के दौरान 25 करोड़ लोग ‘गरीबी से बाहर’ निकाले गए हैं। फिर भी 81 करोड़ से अधिक लोगों को प्रति माह ‘मुफ्त अनाज’ बांटा जा रहा है। इस तरह कई विरोधाभास और सवाल बजट के वक्त उभरे हैं, जिनका जवाब प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं। हम उम्मीद करें कि आने वाले समय में इस बजट से आम नागरिक को कितनी राहत मिलती है और मध्यम वर्ग के लिए जीवनयापन करना कितना संभव होता है। बहरहाल सरकार अपने वादे पर कितनी खरी उतरती है, यह देखना होगा।

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