मुंबई। आरबीआइ की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू होगी। यह बैठक वृद्धि पर फोकस करने वाले केंद्रीय बजट, कम महंगाई और लंबे समय से इंतजार कर रहे भारत-अमेरिका ट्रेड डील के परिपेक्ष्य में हो रही है।

आरबीआइ गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुआई वाली छह सदस्यों वाली एमपीसी का फैसला शुक्रवार को घोषित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआइ ने पिछले फरवरी से अब तक रेपो रेट में 125 आधार अंकों की कटौती की है और वृद्धि और महंगाई पर कोई बड़ी चिंता नहीं होने से केंद्रीय बैंक दरों को अपरिवर्तित बनाए रख सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, रेपो रेट में कमी की संभावना ना के बराबर है, क्योंकि नकदी की तंगी को देखते हुए सभी बैंकों के लिए दरों में कटौती करना संभव नहीं होगा। ऐसे में एक ठहराव की ज्यादा संभावना है। उन्होंने कहा कि आरबीआइ नकदी बढ़ाने के उपायों पर विचार करेगा और अगर जरूरत पड़ी तो सीआरआर कम करने पर भी विचार किया जा सकता है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि जनवरी, 2026 के लिए आने वाली खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े और वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 तक के जीडीपी डेटा का आकलन करें तो रेपो रेट में एक ठहराव की जरूरत महसूस होती है।

जनवरी 2026 का खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े 12 फरवरी को जारी किए जाएंगे, जिसमें 2024 को नया आधार वर्ष माना जाएगा। इसी तरह जीडीपी डेटा 27 फरवरी को जारी किए जाएंगे, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष माना जाएगा।

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