खरगोन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र है और जो पहले से विद्यमान है, उसकी घोषणा करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। डॉ. भागवत बुधवार को मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की कसरावद तहसील के ग्राम लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित विचार-प्रेरक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन निमाड़ अभ्युदय रूरल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन एवं श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कई जगह लोग मुझसे कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र की घोषणा कीजिए, मेरा मानना है जो पहले से है, उसकी फिर क्या घोषणा करना। सूर्य पूर्व से उदय होता है, यह घोषणा करने की जरूरत ही नहीं है। जैसे सूर्य पूर्व से ही उदय होता है, उसके लिए किसी घोषणा की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि सेवा, कर्म और सभी के कल्याण पर आधारित एक जीवन-दृष्टि है। सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चैरिटी नहीं, बल्कि सेवा का भाव है।

सभी मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप हैं, इसलिए उपकार नहीं, बल्कि सेवा करना हमारा धर्म है। सेवा से व्यक्ति की शुद्धि होती है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य देखकर और अनुभव से सीखता है। भारत की सभ्यता की यात्रा यह सिखाती है कि सच्चा सुख बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर है। भारत की आध्यात्मिक परंपरा ने मनुष्य को आत्मअन्वेषण की दिशा दी, जिससे शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने संवेदना को मनुष्य का मूल गुण बताते हुए कहा कि दूसरों के दुख की उपेक्षा कर सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता। शिक्षा पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में निहित होता है और शिक्षा का उद्देश्य उसी अंतर्निहित ज्ञान को बाहर लाना है। टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे समाज सुधारकों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि औपचारिक शिक्षा के अभाव में भी उनके कार्यों के कारण आज समाज उन्हें सम्मान देता है। वास्तविक शिक्षा वही है जो विश्व मानवता का बोध कराए, आत्मनिर्भर बनाए और श्रम की प्रतिष्ठा सिखाए। उन्होंने कहा कि भारत का स्वभाव व्यक्ति से अधिक कर्म को महत्व देने का है तथा परिणाम से अधिक प्रामाणिक और उत्कृष्ट कार्य पर बल देता है। भारत की उन्नति का अर्थ केवल मानव विकास नहीं, बल्कि जल, जंगल, नदी, पहाड़, पशु और मानव—सभी का समग्र विकास है। कार्यक्रम में गोष्ट-नर्मदालयाची ऑडियोबुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पद्मश्री महेश शर्मा, नर्मदा न्यास के अध्यक्ष नितिन कर्माकर सहित करीब 300 आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। इसके पूर्व श्री भागवत संस्था निमाड़ अभ्युदय के प्रवास पर पहुंचे। उन्होंने मंदिर दर्शन कर संस्था की सामाजिक, शैक्षणिक एवं सेवा गतिविधियों का अवलोकन किया तथा विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल टेक्नोलॉजी का भ्रमण कर ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की सराहना की।

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