रायपुर। राज्य शासन के आदेश की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती है, इसका जीता जागता उदाहरण गरियाबंद जिले के मैनपुर में देखने को मिलता है। यहां एक अधिकारी बरसों से अंगद की तरह पांव जमायें बैठा है। यह अधिकारी दमदारी के साथ राज्य शासन के तबादला आदेश की खुलेआम अवहेलना कर रहा है। यह मामला गरियाबंद जिले मैनपुर के वेयर हाउस का है। आपको बता दें कि इस अधिकारी का ट्रांसफर बीते जुलाई माह में रायपुर कर दिया है, लेकिन यह अधिकारी नए आधिकारी को चार्ज नहीं दे रहा है। हद तो तब हो गई जब यह अधिकारी वेयरहाउस के चेयरमेन से ट्रांसफर यथावत बाबत् लेटर लिखवा कर ले आया और नये अधिकारी आदेश के 6 माह बाद भी चार्ज नहीं दिया है।

ज्ञात हो कि मैनपुर में पिछले 10 सालों से पदस्थ इस अधिकारी का तबादला गरियाबंद मुख्यालय से लगातार 15 साल रहने के बाद अभनपुर हुआ था। यहां कुछ साल रहने के बाद भवानी पटना हुआ वहां कुछ समय रहकर वर्ष 2010 में अपना ट्रांसफर मैनपुर में करवा लिया तब से लेकर अब तक मैनपुर में ही पदस्थ है। 19 मई 2020 को प्रबंध संचालक द्वारा अनुमोदित आदेश के द्वारा लेखा शाखा प्रधान कार्यालय रायपुर में हुआ है। लेकिन इस अफसर ने पारिवारिक स्वास्थ्यागत कारणों का हवाला देते हुए यहां से हटने का नाम नहीं ले रहा है।

इस अफसर को सहायक छग स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन, शाखा मैनपुर को आदेशित किया गया था कि शाखा मैनपुर का संपूर्ण प्रभार अभिषेक साहू को सौंपने एवं कार्यमुक्त होकर मुख्यालय रायपुर के लेखा शाखा में देने निर्देश भी दिया गया था। इस मामले की जानकारों की मानें तो स्थानीय ट्रांसपोर्टरों एवं सेल्समैनों की शिकायत के चलते इसको मैनपुर से रायपुर ट्रांसफर किया गया था। लेकिन यह अधिकारी अपनी राजनीतिक पहुंच का धौंस दिखाते हुए एक जगह पर जमे हुए है। इस अफसर ने अपना ट्रांसफर रूकवाने वेयर हाउस के चेयरमैन दुर्ग विधायक अरूण वोरा की अनुशंसा पत्र को आधार बनाया है, जिसमें इनको पारिवारिक एवं स्वास्थ्यगत कारणों के चलते इसे मैनपुर में ही यथावत रखने की अनुशंसा की गई है। अब यहां पर सवाल यह उठता है कि क्या यह अधिकारी राज्य शासन के आदेशों से उपर है जो इस तरह से चेयरमैन की अनुशंसा पत्र को अपना हथियार बनाकर एक ही जगह पर जमे हुए है। जबकि होना तो यह चाहिए इसे राज्य शासन के आदेश का परिपालन करते हुए शासन के आदेशानुसार मैनपुर का संपूर्ण प्रभार अभिषेक साहू को सौंपा जाये।


















