राजनांदगांव। महिलाओं और बच्चों के सुपोषण के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग एक जिम्मेदार पालक की तरह कार्य कर रहा है। नवजात बच्चे के लिए पहले सुनहरे 1,000 दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं, इस संदेश के साथ कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में कई कारगर एवं प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें महतारी जतन योजनांतर्गत गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में कुल 13,524 गर्भवती महिलाएं प्रतिदिन गरम भोजन प्राप्त कर रही हैं। ऐसे ही विभिन्न प्रयासों से गर्भवती माताओं को प्रतिदिन आंगनबाड़ी केन्द्र आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, उनका नियमित स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण किया जा रहा है। उन्हें पात्रता अनुसार प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मनरेगा मातृत्व भत्ता और भगिनी प्रसूति योजना का लाभ देने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र एवं स्वास्थ्य केन्द्र में प्रचार-प्रसार व पंजीयन भी किया जा रहा है। जिले में 1 जुलाई 2019 से कुपोषण मुक्ति हेतु विशेष कार्ययोजना तैयार कर विभागों के समन्वय तथा सामुदायिक सहभागिता से अभियान प्रारंभ किया गया है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक कुपोषित बच्चे की प्रतिदिन आंगनबाड़ी केन्द्र में उपस्थिति, पोषण आहार प्रदाय, गृह भेंट एवं सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों के माध्यमों से पोषण स्तर में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। वहीं महतारी जतन योजना के अंतर्गत सभी गर्भवती माताओं को निकट स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह कुपोषित बच्चों का प्रत्येक बुधवार को स्वास्थ्य जांच एवं गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजनांतर्गत इस वर्ष अब तक 9,093 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई एवं 4,281 गंभीर कुपोषित बच्चों को दवा का नि:शुल्क वितरण किया गया है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जिले में 6 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं, जिसमें नियमित रूप से बच्चों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में माह फरवरी 2020 तक कुल 960 अति गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में इलाज कर सुपोषित किया गया। पोषण पुनर्वास केन्द्र में 14 दिवस लाभ लेने के बाद घर पर बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने के लिए अभिभावकों की काउंसलिंग स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। 2 अक्टूबर 2019 से जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान भी प्रारंभ किया गया है, जिसके तहत शून्य से 5 वर्ष तक के गंभीर कुपोषित बच्चों एवं एनीमिया पीडि़त गर्भवती माताओं को सप्ताह में 3 दिवस अतिरिक्त आहार-अंडा अथवा मूंगफली गुड़ चिक्की दी जा रही है। जिले में 15-49 वर्ष की चिन्हांकित एनीमिया पीडि़त महिलाओं की कांऊसलिंग भी की जा रही है। इसके अलावा 1-3 वर्ष के 11,650 मध्यम एवं गंभीर कुपोषित बच्चों (सप्ताह में 1 दिवस) तथा 433 महिलाओं (15-49 वर्ष) को आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्रतिदिन गरम भोजन से लाभान्वित किया जा रहा है। कुपोषण से बचाव के लिए जिले में कार्ययोजना तैयार कर परिवार सम्मेलन किए जा रहे हैं। इसमें कुपोषित बच्चों के परिवार को बच्चों की देखभाल व पोषण से संबंधित जानकारी दी जाती है। इसके अलावा कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा के मार्गदर्शन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास रेणु प्रकाश के प्रयास से आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घरों में उपलब्ध स्थान में पोषण वाटिका लगाया जा रहा है।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी आवश्यक नियमों का पालन करते हुए माताओं और बच्चों को साबुन से हाथ धुलाकर प्रवेश करा रही हैं। इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण संवाद वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है एवं पोषण के संबंध में जनप्रतिनिधियों से सार्थक चर्चा की जा रही है। पोषण सखी द्वारा गर्भवती माताओं को नियमित रूप से पोषण संबंधी सलाह दी जा रही है।

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