उत्तरी अफ्रीका- बेहतर जिंदगी की तलाश और यूरोप पहुंचने की चाहत एक बार फिर दर्जनों लोगों के लिए काल बन गई । उत्तरी अफ्रीका के देश लीबिया के तट के पास एक खौफनाक समुद्री हादसे में कम से कम 53 प्रवासियों के मरने की खबर है। जानकारी के मुताबिक, क्षमता से अधिक लोगों से भरी एक जर्जर नाव भूमध्य सागर की तूफानी लहरों का सामना नहीं कर सकी और बीच समंदर में पलट गई। इस हादसे ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अवैध प्रवास और मानव तस्करी के खतरनाक खेल की ओर खींचा है।

मौत का सफर: कैसे हुआ हादसा ?

जानकारी के मुताबिक, यह नाव लीबिया के पश्चिमी तट से रवाना हुई थी। तस्करों ने एक छोटी रबर की बोट में दर्जनों लोगों को जानवरों की तरह ठूंस दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों और राहत एजेंसियों के अनुसार, नाव पर कोई भी सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं था। बीच समुद्र में इंजन खराब होने या तेज लहरों की चपेट में आने से नाव का संतुलन बिगड़ा और वह डूब गई। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो गरीबी और युद्ध से बचने के लिए यूरोप (इटली या माल्टा) जाने की कोशिश कर रहे थे।

भूमध्य सागर: दुनिया का सबसे जानलेवा रूट

संयुक्त राष्ट्र और प्रवासन के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन (IOM) के आंकड़े बताते हैं कि लीबिया से यूरोप जाने वाला यह रास्ता दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रूट है। इसे अब ‘तैरता हुआ कब्रिस्तान’ कहा जाने लगा है। तस्कर भारी रकम वसूलने के बाद भी प्रवासियों को बेहद कमजोर नावों में भेजते हैं, जो अक्सर मंजिल तक पहुंचने से पहले ही डूब जाती हैं। 53 लोगों की यह मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मानवता पर लगा एक और बदनुमा दाग है।

अंतरराष्ट्रीय संगठन (IOM) ने दुख जताया

प्रवासन एजेंसी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि समुद्र में ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ (बचाव अभियान) की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने यूरोपीय देशों से मांग की है कि वे समुद्र में फंसे लोगों को बचाने के लिए और अधिक संसाधन उपलब्ध कराएं।

मानवाधिकार समूह: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लीबियाई तटरक्षकों और यूरोपीय नीतियों की आलोचना की है। उनका कहना है कि सुरक्षित रास्ते न होने के कारण मजबूर लोग तस्करों के जाल में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं।

रैस्क्यू ऑपरेशन जारी: लीबियाई कोस्ट गार्ड और कुछ एनजीओ के जहाज अभी भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। हालांकि, 53 लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद अब ना के बराबर है। समुद्र से कुछ शव बरामद किए गए हैं, लेकिन खराब मौसम बचाव कार्य में बाधा बन रहा है।

जीवित बचे लोगों की हालत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ही लोग इस हादसे में बाल-बाल बचे हैं। उन्हें तट पर लाया गया है, लेकिन वे गहरे सदमे में हैं और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हैं।

इस पूरी त्रासदी का सबसे काला पहलू वे मानव तस्कर हैं जो लीबिया में सक्रिय हैं। लीबिया में जारी राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठा कर ये गिरोह अफ्रीकी और एशियाई देशों के गरीब लोगों को यूरोप भेजने का सपना दिखाते हैं। वे इनसे हजारों डॉलर वसूलते हैं और बदले में उन्हें मौत के मुंह में धकेल देते हैं। यह हादसा सवाल खड़ा करता है कि आखिर इन ‘मौत के सौदागरों’ पर नकेल कब कसी जाएगी? जब तक लीबिया में कानून का राज स्थापित नहीं होता, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।

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