पाकिस्तान की यही नियति थी। उसे इसी तरह चाटना था। उसने सिर्फ बांग्लादेश की पैरोकारी और अंतत: ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की खातिर टीम इंडिया से मैच खेलने का बहिष्कार किया था। यह टी-20 विश्व कप का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का आयोजन है। पाकिस्तान हो या कोई अन्य देश हो, इस आयोजन के बेमानी बहिष्कार के मायने गंभीर और संवेदनशील होते हैं। देश अपनी पहचान तक खो सकते हैं, लंबी पाबंदियां झेलनी पड़ सकती हैं और आर्थिक नुकसान असहनीय होता है। पाकिस्तान ने 1970-71 के दौर में बांग्लादेश के ‘मुक्ति संग्राम’ के दौरान लाखों बेगुनाह लोगों की लाशें बिछाई थीं, औरतों के साथ वहशी बलात्कार किए गए थे, बच्चों के कत्लेआम किए गए थे, बांग्लादेश उस दौर को कैसे भूल सकता है? पाकिस्तान के साथ नए रिश्तों की पींगें कैसे बढ़ा सकता है? कोई तानाशाह, संवेदनहीन व्यक्ति भी इन सवालों के जवाब नहीं दे सकता। बहरहाल पाकिस्तान की विडंबना देखिए कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ऐलान किया था कि उनकी क्रिकेट टीम भारत के साथ मैच नहीं खेलेगी, लेकिन दो दिन बाद ही उन्हें अपनी नौटंकी वापस लेनी पड़ी कि दोस्तों का आग्रह है, लिहाजा 15 फरवरी को भारत-पाकिस्तान मैच में उनकी टीम खेलेगी। कितना बौना, असहाय, नासमझ है पाकिस्तान का वजीर-ए-आजम! यह बौनापन इसलिए भी गौरतलब और चिंतनीय है, क्योंकि पाकिस्तान का ‘संवैधानिक शाह’ जनरल मुनीर और उसके साले, पाक गृहमंत्री, पाक क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी अंदरूनी तौर पर चाहते थे कि भारत के साथ मैच खेला जाना चाहिए। लिहाजा कुछ शर्तों का भी ढोंग किया गया। मसलन-आईसीसी निर्देश दे कि भारत-पाक द्विपक्षीय शृंखला खेली जाए।

बेशक शृंखला का आयोजन किसी तटस्थ मैदान पर किया जाए। आईसीसी भारत, पाक, बांग्लादेश क्रिकेट की त्रिपक्षीय शृंखला के लिए भी निर्देश दे। यह भी शर्त रखी गई कि टीम इंडिया बांग्लादेश का दौरा करे। गौरतलब यह है कि आईसीसी ने तीनों ढोंगिया शर्तें खारिज कर दीं और साफ किया कि यह उसका विशेषाधिकार नहीं है। आईसीसी ने भारत के साथ मैच खेलने का पाकिस्तान का आखिरी फैसला जानना चाहा। ये औपचारिकताएं अंतरराष्ट्रीय मंच पर करनी जरूरी हैं। अलबत्ता पीसीबी को आगाह किया गया कि यदि मैच का बहिष्कार किया जाता है, तो उसे करीब 315 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ सकता है। पाकिस्तान पर कई पाबंदियां थोपी जा सकती हैं। आईसीसी मैचों की मेजबानी की सूची से उसे बाहर किया जा सकता है। पाकिस्तान को कुल करीब 1000 करोड़ रुपए की चपत लग सकती है। आखिर भूखा, नंगा, कटोरा देश इतने बड़े नुकसान की भरपाई कैसे कर सकता है? सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, तुर्किए सरीखे देशों ने ‘उधारी’ देने से इंकार कर दिया है, बल्कि चीन तो कर्ज के पैसे वापस मांग रहा है। ऐसे हालात के तहत घबराते, डरते, कांपते हुए पीसीबी को मैच खेलने की हामी भरनी पड़ी। आईसीसी ने इतना जरूर माना कि टी-20 विश्व कप से हटने पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। सहमति यह भी बनी कि 2031 से पहले बांग्लादेश किसी आईसीसी आयोजन की मेजबानी करेगा। दरअसल यह विषय इसलिए बेहद गंभीर है, क्योंकि आईसीसी के राजस्व में से मात्र 6 फीसदी से भी कम हिस्सा पीसीबी का है, जबकि बीसीसीआई को 38 फीसदी हिस्सा दिया जाता है। यह भी एक कारण था, जो आईसीसी पाकिस्तान के बहिष्कार से नाराज थी। हालांकि पीसीबी ने 15 फरवरी का मैच कोलंबो (श्रीलंका) में खेलने की रजामंदी दे दी है, लेकिन कुछ भारतीय पाक से क्रिकेट नहीं चाहते।

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