हाल ही में चीन में ‘जातीय एकता एवं प्रगति संवर्धन कानून’ लागू हुआ है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य चीनी राष्ट्र के साझा समुदाय के निर्माण को आगे बढ़ाना है और इसे चीन के विभिन्न जातीय समूहों का व्यापक समर्थन मिला है। लेकिन कुछ बाहरी ताकतें इस कानून को ‘अल्पसंख्यकों को जबरन आत्मसात करने’ का नाम देकर जनमत को गुमराह कर रही हैं। चीनी जन राजनीतिक परामर्श सम्मेलन के सदस्य के नाते मुझे इस कानून पर हुई चर्चा में भाग लेने का अवसर मिला था। इसी अनुभव के आधार पर कुछ बातें साझा करना चाहता हूं।

पहला, यह कानून व्यापक सहमति को बढ़ावा देता है और विविधता का सम्मान करता है। चीनी राष्ट्र पांच हजार वर्षों से भी अधिक प्राचीन सभ्यता वाला एक महान राष्ट्र है। लंबे इतिहास में चीन के विभिन्न जातीय समूहों ने एक-दूसरे से सीखते और घुलते-मिलते हुए ऐसी चीनी सभ्यता का निर्माण किया, जिसकी पहचान विविधता में एकता, खुलेपन और समावेश से होती है। विभिन्न जातीय समूहों का रिश्ता ऐसा है कि ‘तुम में मैं, मुझ में तुम’ की भावना स्वाभाविक रूप से दिखाई देती है। इसलिए ‘अल्पसंख्यकों के जबरन आत्मसात’ का कथित आरोप महज एक झूठ है।

कानून की दृष्टि से चीन का संविधान स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है कि सभी जातीय समूह समान हैं तथा किसी भी समूह के विरुद्ध भेदभाव और दमन निषिद्ध है। यह कानून संविधान की इसी भावना का पूर्णतः प्रतिबिंब है। इसके प्रविधान संविधान के सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करते हैं। इसमें यह भी लिखा है कि राज्य समानताओं को बढ़ावा देगा, विविधताओं का सम्मान और समावेश करेगा, विभिन्न जातीय समूहों के बीच पारस्परिक सहयोग व सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करेगा तथा चीनी राष्ट्र की महान एकता की रक्षा करेगा।

व्यावहारिक स्तर पर चीन हमेशा अल्पसंख्यक जातीय समूहों की संस्कृति के संरक्षण को महत्व देता रहता है। शीत्सांग (तिब्बत) के पोताला महल और जोखांग मंदिर जैसे सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। ‘कुतदगु बिलिग’ सहित विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे अनेक प्राचीन ग्रंथों का चीनी और उइगुर भाषाओं में अनुवाद, संपादन तथा प्रकाशन किया गया है। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल चीन की 45 परियोजनाओं में से एक-तिहाई से अधिक अल्पसंख्यक जातीय समूहों की संस्कृति से जुड़ी हैं।

दूसरी बात, यह कानून सभी जातीय समूहों के विकास के अधिकार की रक्षा करता है। हाल के वर्षों में चीन के आधुनिकीकरण ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनका लाभ अल्पसंख्यक जातीय समूहों को भी व्यापक रूप से मिला है। चीन के अल्पसंख्यक जातीय क्षेत्रों में गरीबी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

शीत्सांग, शिनच्यांग सहित पांच जातीय स्वायत्त क्षेत्रों का सकल क्षेत्रीय उत्पाद 2012 में 515 अरब डालर से बढ़कर 2025 में लगभग 1.21 ट्रिलियन डालर हो गया है। सीपीसी केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग ने कहा है कि चीनी राष्ट्र एक बड़ा परिवार है और परिवार के प्रत्येक सदस्य को बेहतर जीवन जीना चाहिए। ‘जातीय एकता एवं प्रगति संवर्धन कानून’ साझा समृद्धि और विकास को बढ़ावा देने को अपना प्रमुख विषय बनाता है। इसमें क्षेत्रीय समन्वित विकास को बढ़ावा देने, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों के विकास तथा बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं की समानता और सुलभता बढ़ाने के लिए ठोस व विस्तृत प्रावधान किए गए हैं, ताकि सभी जातीय समूह विकास के लाभ समान रूप से प्राप्त कर सकें।

तीसरी बात, यह कानून विभिन्न जातीय समूहों के आपसी मेल-जोल को बढ़ावा देता है। चीन में अल्पसंख्यक जातियों की एक-तिहाई से अधिक जनसंख्या नगरों तथा बिखरे हुए क्षेत्रों में निवास करती है। अल्पसंख्यक जातियों की प्रवासी जनसंख्या 3.3 करोड़ से अधिक हो चुकी है। विभिन्न जातीय समूहों के बीच आपसी मेल-जोल का स्तर एवं इसकी आवश्यकता अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है। ‘जातीय एकता एवं प्रगति संवर्धन कानून’ में ऐसे सामाजिक वातावरण के निर्माण पर जोर दिया गया है, जहां विभिन्न जातीय समूह साथ रहें, साथ पढ़ें, मिलकर निर्माण करें, उपलब्धियां साझा करें, साथ काम करें और आनंदपूर्वक जीवन बिताएं।

यह कानून चीन की परिस्थितियों के अनुरूप जातीय मुद्दों के सही समाधान का विधिक सार है। यह न केवल चीन के लोगों के हित में है, बल्कि अन्य देशों को भी जातीय मुद्दों से निपटने का उपयोगी अनुभव प्रदान करता है। चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताएं तथा एकीकृत बहुजातीय राष्ट्र हैं। दोनों ने लंबे अनुभव के आधार पर अपनी-अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप जातीय नीतियां विकसित की हैं। चीन भारत के साथ संवाद और आदान-प्रदान को और मजबूत करने का इच्छुक है, ताकि दोनों देश साथ मिलकर राष्ट्रीय शासन के स्तर को उन्नत कर सकें, ग्लोबल साउथ के बहुजातीय देशों के शासन अनुभवों को समृद्ध बना सकें तथा अधिक सौहार्दपूर्ण, स्थिर, समृद्ध और बेहतर विश्व के निर्माण में योगदान दे सकें।

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