केंद्रपाड़ा: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दलित लड़की को आंगनवाड़ी सेंटर का कुक बनाने पर कई मां-बाप ने अपने बच्चों को वहां भेजना ही बंद कर दिया। इस वजह से सेंटर लगभग तीन महीने तक बंद रहा।
4 महीने पहले हुआ था दलित लड़की का अपॉइंटमेंट
जिले के अधिकारियों ने करीब चार महीने पहले राजनगर ब्लॉक में घड़ियामाला ग्राम पंचायत के नुआगांव सेंटर में ग्रेजुएट सरमिस्ता सेठी को आंगनवाड़ी हेल्पर के तौर पर अपॉइंट किया था। इसके तुरंत बाद गांव की कमेटी ने दलित के अपॉइंटमेंट के विरोध में बच्चों को आंगनवाड़ी सेंटर भेजना ही बंद कर दिया। इस कमेटी में ज्यादातर ऊंची जाति के लोग थे। अधिकारी अभी तक इस रुकावट को खत्म नहीं कर पाए हैं, जिसमें करीब 60 बच्चों की किस्मत अधर में लटकी हुई है।
बच्चों को सेंटर पर न भेजने की हिदायत
इस गांव में करीब 45 परिवार रहते हैं, जिनमें सात दलित परिवार भी शामिल हैं। सरमिस्ता सेठी को ऊंची जाति के मां-बाप से खुले तौर पर विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने ऊंची जाति के आंगनवाड़ी वर्कर लिजारानी पांडव से कहा कि उनके बच्चे दलित महिला के हाथ का बना खाना नहीं खाएंगे। जानकारी के अनुसार, गांव की कमेटी के हेड ने भी परिवारों को अपने बच्चों को सेंटर पर न भेजने की हिदायत दी है।
बच्चों को सेंटर पर भेजना किया बंद
सरमिस्ता सेठी ने बताया कि उनकी पोस्टिंग 24 नवंबर, 2025 को हुई थी। उन्होंने कहा कि कुछ ऊंची जाति के लोगों ने मुझे बच्चों के लिए खाना न बनाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आगे बताया कि जब मैंने उनकी बात नहीं मानी, तो उन्होंने अपने बच्चों को सेंटर भेजना बंद कर दिया। उन्होंने ये भी कहा कि यहां तक कि औरतों ने भी सेंटर पर आना बंद कर दिया है। घड़ियामाला पंचायत के सरपंच शैलेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने गांव के मुखिया और दूसरों से बच्चों को सेंटर भेजने की रिक्वेस्ट की थी। सरपंच ने कहा कि लेकिन उन्होंने नहीं सुना। शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रेग्नेंट औरतें भी सेंटर से बच रही हैं और जरूरी हेल्थ बेनिफिट्स से वंचित रह रही हैं।
प्रेग्नेंट महिलाओं को रोकने वालों पर होगा एक्शन
लिजारानी पांडव ने बताया कि उन्होंने राजनगर ब्लॉक के चीफ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (सीडीपीओ) को इस बारे में बताया है, जिन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया है कि बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं को सेंटर आने से रोकने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। सीडीपीओ दीपाली मिश्रा ने कहा कि कई ऊंची जाति के माता-पिता इस बात का विरोध कर रहे हैं कि उनके बच्चे एक दलित महिला के हाथ का बना खाना खाएं। उन्होंने कहा कि हम उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने और राजनगर तहसीलदार ने मंगलवार को गांव वालों से बात की, लेकिन मामला अभी भी सुलझा नहीं है।














