Does Sleeping with Phone Cause Cancer in India: भारत में ज्यादातर लोग सोने से पहले मोबाइल स्क्रॉल करते हैं या फोन को सिरहाने रखकर ही सो जाते हैं. यह आदत आम हो चुकी है, लेकिन क्या यह सेहत पर असर डाल सकती है? लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. मायरो फिगुरा ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में इसी मुद्दे पर चेतावनी दी है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या उन्होंने क्या कहा और क्या सच में इससे कैंसर का खतरा होता है. 

क्या सच में इससे कैंसर हो सकता है?

क्या सच में मोबाइल सेहत को प्रभावित कर सकता है? डॉ. फिगुरा का कहना है कि सोते समय फोन को सिर के पास रखना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक, “अगर आप फोन को सिर के बिल्कुल पास रखकर सोते हैं, तो इस आदत को बदल देना चाहिए. फोन तब भी रेडिएशन छोड़ता है जब आप उसे इस्तेमाल नहीं कर रहे होते. यह नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, सिरदर्द की वजह बन सकता है और लंबे समय में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है.”

नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन

रेडिएशन को लेकर वे स्पष्ट करते हैं कि मोबाइल से निकलने वाला विकिरण “नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन” होता है. यह आयोनाइजिंग रेडिएशन जैसे सूरज की किरणें, मेडिकल इमेजिंग या रेडियोधर्मी सोर्स की तरह सीधे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता. लेकिन फिर भी यह रेडिएशन की श्रेणी में आता है. इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “इंसानों के लिए संभावित रूप से कार्सिनोजेनिक” श्रेणी में रखा है. उसी श्रेणी में जहां कॉफी और अचार जैसी चीजें भी आती हैं.

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