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रायपुर। गिरदावरी रिपोर्ट बनाने में पटवारियों द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही है। इसी लापरवाही के चलते कोंडगांव में एक किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। हद तो तब हो गई जब पटवारी की लापरवाही के चलते कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के चचेरे भाई यशवंत चौबे का रकबा ही छूट गया। अब सोचिये जब मंत्री के भाई के साथ इस तरह से लापरवाही सामने आ रही है तो सोचिये प्रदेश के अन्य किसानों को क्या होल होगा…? जब इस लापरवाही से पटवारी को अवगत कराया गया तो उन्होंने त्रुटि सुधार करते हुए तिल्दा तहसीलदार को धान पंजीयन में रकबा जोडऩे के लिए आवेदन किया है। मामला ग्रामीण सेवा सहकारी समिति सांकरा का है। पटवारी द्वारा तहसीलदार को लिखे गये आवेदन में कहा गया है कि ग्रामीण सेवा सहकारी समिति सांकरा पंजीयन क्रमांक 1548 में किसान यशवंत चौबे पिता हुतेन्द्र चौबे के नाम पर ग्रामीण सेवा सहकारी समिति सांकरा उपार्जन केन्द्र सांकरा में पंजीयन है। इनके नाम से दो खाता है पूर्व वर्ष कुल रकबा 4.213 हेक्टेयर था। इनके नाम पर दो ग्रामों में खाता होने के कारण ग्राम भूमिया खाता खसरा नंबर 381/21, 381/68, 381/28रकबा 3.605का ही पंजीयन हो पाया है। ग्राम बेमता का खसरा नंबर 327/2 रकबा 0.608 रकबा छूट गया है। अत: निवेदन है कि किसान कोड एफसी4401000100550 कुल रकबा 4.213 हेक्ट.रकबा का पंजीयन किया जाये। उल्लेखनीय है कि ऐसी ही लापरवाही के चलते कोंडागांव में एक किसान जान देने को मजबूर हो गया। आपको बता दें कि कोंडगांव के मारंगपुरी के किसान धनीराम मरकाम के आत्महत्या मामले में हुई जांच में गिरदावरी रिपोर्ट में गलती सामने आई है। किसान का रकबा घट गया था जिससे सौ क्विंटल धान बेचने की उम्मीदें बांधे बैठा किसान को केवल 11 क्विंटल की अनुमति मिली थी। इससे व्यथित कर्ज में डूबे किसान ने फांसी लगा ली थी। हांलाकि इस मामले में पटवारी को निलंबित कर दिया है और तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इसके बाद भी गिरदावरी रिपोर्ट में लापरवाही के मामले सामने आना समझ से परे है।

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