2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज 17 फरवरी को दोपहर 3:26 से शाम 7:52 तक लगेगा. यह वलयाकार ‘रिंग ऑफ फायर’ ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. ग्रहण अंटार्कटिका और दक्षिण अफ्रीका में दिखेगा. पूजा‑पाठ और सामान्य कार्य भारत में जारी रहेंगे.
आज 17 फरवरी 2026, मंगलवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. पंचांग के अनुसार आज ही फाल्गुन अमावस्या भी है. यह ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे आमतौर पर ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता और सूर्य की बाहरी परतें जलते हुए छल्ले की तरह नजर आती हैं.
ग्रहण का समय
शुरुआत: दोपहर 3:26 बजे
मध्यकाल: शाम 5:42 बजे
समापन: शाम 7:52 बजे
भारत में दिखाई नहीं देगा ग्रहण
ज्योतिषाचार्य कृष्ण गोपाल मिश्र के अनुसार यह सूर्य ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा. यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा.
भारत में लोग आज पूजा-पाठ, श्राद्ध और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से कर सकते हैं, क्योंकि ग्रहण का प्रभाव यहां प्रत्यक्ष रूप से नहीं पड़ेगा.
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें?
- मंत्रोच्चार, नाम जप और ध्यान करना शुभ माना जाता है.
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
- भोजन को दूषित होने से बचाने के लिए ग्रहण से पहले खाने में तुलसी का पत्ता रखें.
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें?
- गर्भवती महिलाओं को सुई‑धागा, कैंची, या तेज उपकरणों का उपयोग नहीं करना चाहिए.
- भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें.
- कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से बचें.
किस राशि और नक्षत्र में लगेगा सूर्य ग्रहण?
यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ग्रहण के दौरान कर्क लग्न उदित रहेगा और कई ग्रह अष्टम भाव में एकत्रित होंगे, जिसे शुभ नहीं माना जाता. ज्योतिषियों का अनुमान है कि इसका सीधा प्रभाव पश्चिमी देशों पर दिखाई दे सकता है. वहां अत्यधिक वर्षा, तूफान या प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बन सकती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. )














