चंडीगढ़/रोपड़: रोपड़ जिले में शिवालिक पहाड़ियों को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) को निर्देश दिया है कि वह पॉल्यूशन के नियमों का उल्लंघन करने वाले स्टोन क्रशर के खिलाफ आदेश को सख्ती से लागू करे और उनसे पर्यावरण मुआवजा वसूले। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने गढ़शंकर सब-डिवीजन के बीत इलाके में हो रही अंधाधुंध और गैर-कानूनी माइनिंग से जुड़े एक मामले का निपटारा करते हुए ये निर्देश जारी किए हैं।
बोर्ड की रिपोर्ट से पता चला है कि इलाके के 13 स्टोन क्रशर नियमों का उल्लंघन करते और गैर-कानूनी माइनिंग में शामिल पाए गए हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने ट्रिब्यूनल को बताया कि इन 13 यूनिट्स के खिलाफ वॉटर एक्ट 1974 और एयर एक्ट 1981 के तहत बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा, इन यूनिट्स और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्रिमिनल शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। ट्रिब्यूनल ने बोर्ड से स्टोन क्रशर में इस्तेमाल हो रहे रॉ मटेरियल के सोर्स की भी जांच करने को कहा है। यह जांच पंजाब रेगुलेशन ऑफ क्रशर यूनिट्स एक्ट 2025 और पंजाब स्टेट माइनर मिनरल्स (अमेंडमेंट) पॉलिसी 2025 के नियमों के मुताबिक की जाएगी।
तीन महीने में एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने के निर्देश
N.G.T. ने साफ किया है कि बाकी स्टोन क्रशर की भी जांच की जाएगी ताकि उनके काम करने की हालत और नियमों का पालन पता चल सके। बोर्ड को यह पूरा प्रोसेस तीन महीने में पूरा करके रजिस्ट्रार जनरल को एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया है।














