नेपाल का चुनाव परिणाम दुनिया के उन तमाम देशों के शासकों को एक सबक है, जो राष्ट्र को अपनी जागीर समझ कर शासन चलाने की भूल कर रहे हैं। भारत के पड़ोसी इस नन्हें राष्ट्र का चुनाव परिणाम युवा शक्ति के बदलाव की दृढ़ इच्छाशक्ति का नतीजा है, जहां उनमें पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रभावशाली लोगों के बच्चों तक ही सीमित सुख और अय्याशी पूर्ण जीवनशैली के खिलाफ आग धधक रही थी, जिसकी लपटों में नेपाल की एक से एक पुरानी पार्टियां जलकर राख हो गईं। नेपाल से कम्युनिस्ट पार्टियों का खात्मा भारत के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। 

सत्ता में आ रही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को शहरी प्रभाव वाली पार्टी कहकर इसके सीमित क्षेत्रों तक सिमटने और 4 बार के प्रधानमंत्री ओली को धूल चटाते हुए ऐतिहासिक मतों के अंतर से जीते काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रधानमंत्री का चेहरा रहे बालेन शाह को कड़े मुकाबले में फंसना बताया जा रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों के सारे के सारे अनुमान धरे के धरे रह गए। चुनाव नतीजों में हर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को मिल रही शानदार बढ़त से यह साफ हो गया है कि राजशाही खत्म होने के बाद नेपाल को पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार नसीब होने जा रही है। पार्टी अध्यक्ष रवि लामी छाने ने बालेन शाह को पार्टी में शामिल होते ही प्रधानमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया था। रवि लामी नई सरकार में गृहमंत्री होंगे, यह भी तय है। सरकार गठन के पूर्व उन्होंने राजनीतिक दलों से 40 साल का हिसाब लेने का बयान देकर पुराने राजनीतिक दलों में खलबली मचा दी है। उनका यह बयान भ्रष्टाचार के विरुद्ध खुली जंग के ऐलान के रूप में देखा जा रहा है।

ओली सरकार में बहुत कम दिनों तक गृहमंत्री रहे रवि लामी छाने की छवि एक सख्त गृहमंत्री की उभर कर जनता के सामने आई थी। उन्होंने एक से एक राजनीतिक भ्रष्टाचार को उजागर कर जनता में अपनी छवि ईमानदार नेता की बना ली थी। अमरीकी पृष्ठभूमि के रवि लामी छाने का रुख भारत के प्रति कैसा होता है यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता अमरेश सिंह ने चुनाव परिणाम में पार्टी की बढ़त के बीच काठमांडू में मीडिया के सवालों के जवाब में साफ कहा कि भारत से मधुर संबंध को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है। उसे साथ लेकर नेपाल को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन बालेन शाह हैं तो चीन के खिलाफ लेकिन भारत के प्रति उनके रुख को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है क्योंकि बतौर मेयर उनका अपने कक्ष में ग्रेटर नेपाल का लगाया मानचित्र भारत को खटकता रहा, क्योंकि इस नक्शे में भारत के कई इलाकों को नेपाली भू-क्षेत्र दर्शाया गया है। खैर अब वह एक ऐसे राष्ट्र के प्रधानमंत्री होने जा रहे हैं, जिसका संबंध भारत से केवल खानापूर्ति जैसा नहीं, दोनों के बीच रोटी-बेटी का सदियों पुराना रिश्ता तो है ही, दोनों देश भौगोलिक, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक सभ्यता  की दृष्टिकोण से भी एक-दूसरे से जुड़े हैं।

बालेन शाह से नेपाल के युवाओं और महिलाओं को काफी उम्मीदें हैं। वे जेन जी आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे। आज उनकी इस बात को लेकर तारीफ हो रही है कि जो शख्स नेपाल की दुश्वारियों को भांप कर सरकार अपदस्थ करने का माद्दा रखता हो, उसके द्वारा सरकार चलाने में किसी संशय की गुंजाइश नहीं है। बालेन शाह सरकार के कामकाज के तरीकों पर दुनिया की नजर रहना स्वाभाविक है। इस पार्टी के दो प्रमुख चेहरे बालेन शाह और रवि लामी छाने की कोई लंबी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। बालेन शाह इंजीनियर और रैपर रहे हैं जबकि रवि लामी छाने की पहचान एक पत्रकार की रही है। 2022 के चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का गठन किया, चुनाव लड़े और 20 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की। बालेन शाह काठमांडू के युवाओं में खासा लोकप्रिय थे, निर्दलीय चुनाव लड़े और काठमांडू का मेयर बन गए। एक मेयर से नेपाल का प्रधानमंत्री बनने जा रहे बालेन शाह का जन्म एक साधारण शिक्षक परिवार में हुआ था। पढ़ाई इस स्तर की थी कि वह 2-4 लाख रुपए महीने की नौकरी कर अच्छा जीवन बिता सकते थे लेकिन उन्हें सनक थी संपूर्ण नेपाल की जीवनशैली सुधारने की। नेपाली जनता ने उन्हें यह मौका दे दिया है। अब नेपाल को तरक्की की ओर ले जाने की जिम्मेदारी उनकी है।-यशोदा श्रीवास्तव 

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