नई दिल्ली के वसंत विहार थाने में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां भारतीय सेना के एक पूर्व सैनिक और उनकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से लाखों रुपये हासिल करने के लिए पूर्व सैनिक की मौत का नाटक रचा। शिकायत के मुताबिक पत्नी ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, शपथपत्र और अन्य दस्तावेज जमा कर बीमा राशि का दावा किया। इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा फंड से भुगतान लेने की कोशिश की गई। मामले का खुलासा होने के बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, अखिलेश कुमार वर्ष 1998 में बिहार रेजिमेंट में भर्ती हुए थे और वर्ष 2010 में सेवा से मुक्त हुए। सेवा के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी ज्ञानती देवी को आर्मी बीमा योजना में नामांकित किया था। आरोप है कि वर्ष 2011 में पत्नी ने दावा किया कि 17 सितंबर को करंट लगने से अखिलेश कुमार की मौत हो गई। इसके लिए ग्राम पंचायत से फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, शपथपत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हें जमा कर दिया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से करीब 3 लाख रुपये का क्लेम किया गया। इतना ही नहीं, भुगतान में देरी होने का हवाला देकर 21,750 रुपये अतिरिक्त ब्याज भी हासिल कर लिया गया।

बाद में जहानाबाद जिले की पुलिस जांच में पता चला कि अखिलेश कुमार जिंदा हैं। जांच में यह भी सामने आया कि बीमा राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी पत्नी ने ही प्राप्त की थी। मामला सामने आने के बाद आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड के अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

अदालत के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने अखिलेश कुमार, उनकी पत्नी ज्ञानती देवी और जहानाबाद के एक ग्राम सरपंच के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से बीमा राशि हासिल करने की साजिश रची। जांच में सामने आया कि अखिलेश कुमार को मृत दिखाकर उनकी पत्नी ने बीमा का क्लेम किया और राशि प्राप्त कर ली।

बाद में जांच में यह खुलासा हुआ कि अखिलेश कुमार जीवित हैं, जिसके बाद पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ। शिकायत मिलने पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है। आरोपी फिलहाल गिरफ्तारी के दायरे में हैं और पुलिस जल्द ही उन्हें कोर्ट में पेश कर सकती है।

मामला यहीं नहीं रुका। जब जांच का दायरा बढ़ाया गया तो सच्चाई सामने आई। जहानाबाद जिले की पुलिस जांच में अखिलेश कुमार जिंदा पाए गए। इसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि बीमा राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी पत्नी ने ही प्राप्त की थी। इस खुलासे के बाद आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड के अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की। अदालत के आदेश पर पुलिस ने अखिलेश कुमार, ज्ञानती देवी और जहानाबाद के एक ग्राम सरपंच के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अदालत के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने अखिलेश कुमार, ज्ञानती देवी और जहानाबाद के एक ग्राम सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल आरोपी गिरफ्तारी के दायरे में हैं और पुलिस उन्हें जल्द ही अदालत में पेश कर सकती है। यह मामला दर्शाता है कि बीमा धोखाधड़ी के लिए फर्जी दस्तावेज और प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, जिस पर अब एजेंसियां सख्ती से नजर रख रही हैं।

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