गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बरपेटा स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का नाम बदलकर बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने का ऐलान किया है।। उन्होंने कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं और असम से इस पद तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति थे। राज्य सरकार उनके नाम पर किसी अन्य संस्थान का नाम रखेगी। फखरुद्दीन अली अहमद भारत के पांचवें राष्ट्रपति थे। वो 24 अगस्त 1974 से 11 फरवरी 1977 तक इस पद पर रहे।

भारत के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति

फखरुद्दीन अली अहमद डॉ. जाकिर हुसैन के बाद भारत के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति थे। उनकी मृत्यु 1977 में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए दिल का दौरा पड़ने से हुई। इससे पहले जाकिर हुसैन का भी 1969 में पद पर रहते हुए निधन हुआ था। आज फखरुद्दीन अली अहमद को अक्सर 1975 में लगाए गए आपातकाल से जोड़ा जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर उन्होंने ही आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, राष्ट्रपति बनने से पहले वे लंबे समय तक स्वतंत्रता सेनानी और सक्रिय राजनेता रहे।

दिल्ली में हुआ जन्म

फखरुद्दीन अली अहमद का जन्म 13 मई 1905 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता कर्नल जेड. ए. अहमद थे। उनकी शुरुआती शिक्षा उत्तर प्रदेश के गोंडा और दिल्ली में हुई। 1921 में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक पास किया। इसके बाद वे दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में पढ़े और आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट कैथरीन कॉलेज गए। भारत लौटने के बाद उन्होंने पंजाब हाई कोर्ट में वकालत शुरू की और बाद में 1928 में असम चले गए। 1931 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और 1935 में मुस्लिम आरक्षित सीट से चुनाव जीता। 1938–39 में वे असम में कांग्रेस सरकार में वित्त और राजस्व मंत्री बने।

स्वतंत्रता के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव बढ़ा

1940 में महात्मा गांधी के आह्वान पर असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई के साथ अहमद ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लेने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस कारण उन्हें एक वर्ष की जेल हुई। बाद में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी उन्हें सुरक्षा कैदी के रूप में बंदी बनाया गया और अप्रैल 1945 में रिहा किया गया। स्वतंत्रता के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव बढ़ता गया। 1952–53 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 1957 में संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बाद में वे असम विधानसभा के सदस्य बने और राज्य सरकार में कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

असम के बरपेटा से लोकसभा सांसद चुने गए

  • 1966 में वे केंद्र सरकार में सिंचाई और ऊर्जा मंत्री बने और बाद में शिक्षा मंत्री भी रहे।
  • 1967 में वे असम के बरपेटा से लोकसभा सांसद चुने गए और औद्योगिक विकास मंत्री बने।
  • 1970 में उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया।
  • 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्हें लेबनान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देशों में भारत का पक्ष समझाने के लिए भेजा गया था। राजनीति के अलावा अहमद खेल प्रशासन से भी जुड़े रहे।
  • वे असम के फुटबॉल और क्रिकेट संघों के अध्यक्ष रहे और ऑल इंडिया लॉन टेनिस एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रहे।
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