नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का पूजन की जाती है. चंद्रघंटा की विशेष पूजा व अर्चना करने से मन को शांति मिलती है. मां सारी मुरादें पूरी करती हैं और मानसिक शांति प्रदान करती हैं. विंध्यधाम के विद्यवान आचार्य ने मां चंद्रघंटा के पूजन व अर्चन की विधि बताई है. महाराज ने कहा कि मां चंद्रघंटा को दूध प्रिय है. अगर दूध से बना हुआ खीर हो तो अतिउत्तम. दूध से बने मिष्ठान आदि का प्रयोग कर सकते हैं. इससे मां की कृपा बरसती है.

मां को दिव्य स्वरूपा माना जाता है

पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्चारिणी और नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है. मां को दिव्य स्वरूपा माना जाता है. इस रूप में मां अपने मस्तक पर चंद्रमा को विराजमान की है. यह रूप दिव्य व अलौकिक रूप है. आज के दिन मां के पूजन से मानसिक शांति मिलती है. मां बेचैन मन को शांत करती है. मन स्थिर होने से काम में मन लगता है. मां के पूजन के मन को केन्द्रता की प्राप्ति होती है. मन संतुलित रहता है. कामनाएं भी पूर्ण होती है. मां के इस रूप को इच्छा व मनःशक्ति की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

मां को खीर है प्रिय 

पं. अनुपम महाराज ने बताया कि मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई व दूध से बना खीर ज्यादा प्रिय है. मां को दूध से बने खीर का भोग लगाएं. कुमकुम लगाए. ऐसा करने से मां प्रसन्न होती है और अपना आशिर्वाद व कृपा भक्तों पर बरसाती है. नवरात्रि के तीसरे दिन किसी मंदिर में घंटे का दान कर सकते हैं. यह आपके लिए विशेष लाभकारी होगा. घंटा बजने के साथ ही निर्धनता, कठिन समय व आलस्य आदि दूर होते हैं. माँ की सदैव भक्तों के ऊपर कृपा बनी रहती है.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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