कपूरथला –देश में स्वदेशी रेल निर्माण को एक नई गति देते हुए रेल कोच फैक्टरी, कपूरथला ने अपनी पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का सफल निर्माण किया है। उन्नत एवं पुनर्परिभाषित 16 कोचों वाली यह ट्रेन अंतिम चरण में है और चालू माह के अंत तक संचालन के लिए सौंपे जाने को तैयार है। यह उपलब्धि देश में आधुनिक ट्रेन निर्माण क्षमता के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

पत्र सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित पंजाब मीडिया दौरे पर आए छत्तीसगढ़ के 14 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों ने कोच निर्माण की पूरी प्रक्रिया को नजदीक से देखा और यह समझा कि किस प्रकार कच्चे स्टील से एक आधुनिक यात्री कोच तैयार किया जाता है।

मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए उप महाप्रबंधक श्री अमन कुमार ने वंदे भारत कोचों के नवीनतम संस्करण में शामिल तकनीकी नवाचारों और सुधारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहली बार वंदे भारत ट्रेन का निर्माण आरसीएफ कपूरथला में किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता का विस्तार हुआ है। इससे पहले इसका डिजाइन और निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्टरी चेन्नई में किया गया था। यह पहल इंडियन रेलवेज की निर्माण क्षमता को और सुदृढ़ करेगी।
उन्होंने बताया कि आरसीएफ कपूरथला प्रति वर्ष लगभग 2,200 से 2,300 कोचों का निर्माण करता है, जो रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार विभिन्न प्रकारों (वैरिएंट्स) में तैयार किए जाते हैं। वंदे भारत का मूल डिजाइन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई में विकसित किया गया था, जिसे अब आरसीएफ कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली जैसे उन्नत कारखानों के साथ साझा किया गया है, ताकि अनुभव और फीडबैक के आधार पर निरंतर सुधार किए जा सकें।

उन्नत वंदे भारत कोचों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए श्री कुमार ने बताया कि इसमें कवच (Train Collision Avoidance System) जैसी अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली, क्रैशवर्दी डिजाइन तथा उन्नत अग्नि पहचान एवं शमन प्रणाली लगाई गई है। विशेष रूप से, ट्रेन के शौचालयों में स्मोक डिटेक्टर सेंसर लगाए गए हैं, जो धुआं या आग की स्थिति का तुरंत पता लगाकर अलर्ट देते हैं, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव होती है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति (डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा) तक चलने में सक्षम है और इसमें बेहतर त्वरण एवं मंदन क्षमता है। इसके अतिरिक्त, इसमें उन्नत हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग प्रणाली, आधुनिक इंटीरियर, एर्गोनोमिक सीटिंग, मोबाइल चार्जिंग सुविधा, उन्नत शौचालय, पैंट्री व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली तथा स्वचालित दरवाजे जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वर्ष 1988 में स्थापित रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला आज एक विकसित टाउनशिप के रूप में भी उभरी है, जहां लगभग 5,600 कर्मचारी कार्यरत हैं और लगभग 4,000 आवासीय क्वार्टर उपलब्ध हैं। परिसर में केंद्रीय विद्यालय एवं पंजाब सरकार के विद्यालयों सहित शैक्षणिक संस्थान, एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड, फुटबॉल स्टेडियम, स्विमिंग पूल तथा 18-होल गोल्फ कोर्स जैसी खेल सुविधाएं और बैंक सहित अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
भारतीय रेल में खेल और समग्र विकास को बढ़ावा देने की परंपरा के तहत वर्तमान में आरसीएफ परिसर में अखिल भारतीय अंतर-रेलवे महिला हॉकी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें विभिन्न रेलवे जोनों की टीमें भाग ले रही हैं। रेलवे से जुड़े कई खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
वंदे भारत ट्रेन, जिसे पहले ट्रेन 18 के नाम से जाना जाता था, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित की गई थी और वर्ष 2019 में इसे देश की पहली इंजन रहित सेमी-हाई स्पीड ट्रेन के रूप में शुरू किया गया था। तब से इसमें लगातार सुधार करते हुए इसे और अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक बनाया गया है।
श्री अमन कुमार ने कहा कि आरसीएफ कपूरथला में वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण देश को उन्नत रेल प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह भारतीय रेल की आधुनिकीकरण एवं यात्री-केंद्रित विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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