जल संसाधन विभाग के इस अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण संबंधी इस खबर के दूसरे किश्त में हम जो आपको बताने जा रहे है उसने जानकर आपको आश्चर्य होगा, लेकिन यह सत्य है। शीर्षक पढ़कर आप भी जानना चाह रहे होंगे कि आखिर भूपेश सरकार के यह मंत्री कौन है…? हमने इस अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण की शुरुआती जानकारी पहले अंक दे चुके है, लेकिन हमारे नये पाठकों को हम बताना चाहते है कि जल संसाधन विभाग के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण के इस सीधे सरल प्रकिया को जटिलता का रूप प्रदान करते हुए जल संसाधन विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश के आये बुद्धिमान मंत्रालयीन कर्मचारी द्वारा जटिल नियमों का हवाला देते हुए इस प्रकरण को अनावश्यक रोक दिया गया है। इसी अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण में आवेदिका सरिता द्वारा मुख्यमंत्री को आवेदन दिये जाने के पश्चात कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे को भी आवेदन दिया गया है। प्रस्तुत आवेदन में आवेदिका द्वारा कहा गया है कि विगत वर्ष 15 दिसंबर 1996 को मेरे स्वर्गीय पिताजी शासकीय सेवा में रहते हुए आकस्मिक निधन के तुरंत बाद वर्ष 1997 से प्रार्थनीय लगातार आवेदन निवेदनों एवं पत्राचारों से जूझते हुए अनावश्यक नियम कानूनों की पेचीदगी के आगे बेबस हो गई है। आवेदिका ने आवेदन के माध्यम से मंत्री रविन्द्र चौबे से कहा कि मैं अश्रुपुरित प्रार्थना करती हूं कि पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश सरकार ने सकारात्मक कार्यवाही की किंतु वर्तमान में श्रीमान आपके अधीन छग शासन जल संसाधन विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश के आये हुए बुद्धिमान मंत्रालयीन कर्मचारी द्वारा जटिल नियम कानूनों का हवाला देकर मेरी अनुकंपा नियुक्ति को अनावश्यक रोक दिया। विभागीय मंत्री के अधीन जल संसाधन के 2-3 पत्राचारों को संलग्न कर रही हूं, सहज ही सहमत हो सके कि मुझ आवेदिका द्वारा सही समय पर बिना किसी चूक किये हुए आवेदन एवं संपूर्ण औपचारिकताओं की पूर्ति की गई। किंतु विभाग द्वारा ही पूछताछ/क्वेरी छानबीन के आड़ में समय की हत्या की गई। इस बीते हुए एक लंबे अंतराल से मैं स्वयं अपने बच्चों सहित वर्तमान में अवसाद की कगार पर पहुंच चुकी हूं। मंत्री जी को प्रस्तुत आवेदन में आवेदिका कहा कि मैं बहुत भारी मन से विवश एवं अशक्त होकर माननीय मंत्री जी से विनती करती हूं कि महति कृपा करके कैबिनेट संपन्न कराकर समय की शिथिलता की बिंदु को शामिल कर प्रस्ताव पारित करवाने की कृपा कीजियेगा, मेरी अनुकंपा नियुक्ति पर बनावटी रोक/अवशेष समाप्त होकर विभाग से आदेश परित हो सके। इस हेतु आश्रित छोटे-छोटे बच्चों की आत्मा से मंत्री महोदय को जो दुआयें मिलेंगी उसका आप सहज ही अहसास कर सकेंगे। आवेदिका द्वारा प्रस्तुत इस आवेदन में विभागीय मंत्री द्वारा मुख्य सचिव छग शासन कृपया निर्णय लें मार्क करते हुए हस्ताक्षर किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या मंत्री में निर्णय लेने की क्षमता नहीं है…?

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