अभी मार्च महीने में ही 50 लाख रुपए के इनामी पापा राव और एक अन्य बड़े नक्सली ने हथियार डाल दिए। उसके अलावा कोसा सोड़ी उर्फ सुकरू ने उड़ीसा में सरेंडर कर दिया। अब ताजा हालत यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य के सिर्फ तीन जिलों में यह आंदोलन सिमट कर रह गया है और यह दम तोड़ चुका है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का अंत कर दिया जाएगा। गृह मंत्रालय ने इसके अनुरूप योजनाएं बनाईं और हमारे साहसी जवानों ने जान पर खेलकर उन्हें कार्यान्वित किया। सरकार के उठाए गए आर्थिक कदमों का असर साफ दिखाई दिया। गांवों और आदिवासी इलाकों में आर्थिक स्थिति में सुधार आने से नक्सलवादियों को अपने काडर में भर्ती के लिए लोग मिलने बंद होने लगे…

स्वतंत्रता के बाद भारत विदेशी आक्रमण का कई बार शिकार हुआ। कभी पाकिस्तान ने तो कभी चीन ने हमले किए। हमारे जांबाज सैनिकों ने उन्हें इन युद्धों में अपना शौर्य दिखाया और दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। लेकिन साठ के दशक के उत्तरार्ध में भारत में आंतरिक सुरक्षा का एक बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया जब बंगाल में नक्सलवाड़ी आंदोलन शुरू हुआ। वहां से शुरू होकर यह कैंसर की तरह देश के विभिन्न भागों में फैलता गया। इसे रोकने के प्रयास निष्फल रहे और इसने धीरे-धीरे कई राज्यों में अपनी पकड़ जमा ली। स्थिति ऐसी हो गई कि इस सदी के आते-आते उनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई कि वे देश के 126 जिलों में बेलगाम हिंसा, खूनखराबा, जबरन वसूली, अपहरण जैसी घटनाओं को हर रोज अंजाम देने लगे तथा हमारे सशस्त्र बलों के जवानों को शहीद करने लगे। 6 अप्रैल 2010 का दिन सीआरपीएफ के जवानों के लिए काला दिन था जब एक हजार सशस्त्र नक्सलवादियों ने रात में घात लगाकर 76 जवानों की नृशंसता से हत्या कर दी। उसके बाद भी कई बार हमारे वीर जवानों को घात लगाकर या धोखे से मारा गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों तथा तथा अन्य लोगों को भी बड़े पैमाने पर मारा गया। हिंसा का यह तांडव रुक नहीं रहा था और छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार जैसे राज्यों में ये अपनी समानांतर सरकार चलाने लग गए।

हजारों करोड़ रुपए के आर्थिक संसाधनों पर इन लोगों ने एक तरह से कब्जा जमा लिया। इन राज्यों का एक बड़ा इलाका रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाने लगा। इन तत्वों ने स्थानीय प्रशासन को पंगु बना दिया और इनके खिलाफ कोई भी बड़ी कार्रवाई करने में राज्य सरकारें कतराती थीं। लेकिन 2014 के बाद से परिदृश्य में बदलाव आया। नरेन्द्र मोदी की सरकार ने आते ही इस दिशा में सख्ती बरतनी शुरू कर दी। जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई। अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद तो इसमें काफी तेजी आई और कई सारी ठोस नीतियां बनाई गईं और सरकार की समझ में आ गया कि सिर्फ बंदूक के बल पर इस समस्या को हल नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि विकास कार्यों में बढ़ोतरी की जाए और आदिवासी इलाकों में आय तथा रोजमर्रा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। गांवों में बुनियादी ढांचों का विकास किया जाए और उन्हें एक दूसरे से जोड़ा जाए। शिक्षा का प्रसार किया जाए, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए व स्वरोजगार बढ़ाया जाए। नागरिकों को विश्वास में लिया जाए और उनकी मदद की जाए। इन पर सरकार और गृह मंत्रालय ने सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च किए। नक्सलवादी भी इस कदम को समझ रहे थे, इसलिए उन्होंने सैकड़ों जगहों पर सडक़ें बनाने के काम को रोकने के लिए अपार हिंसा की। उन्होंने सडक़ों को बारूद से उड़ाया, धमाके किए, सैकड़ों वाहनों को आग लगाई, मजदूरों को मारा पीटा, सीआरपीएफ की टुकडिय़ों पर घात लगाकर हमले किए। लेकिन केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सख्ती करनी शुरू की। सीआरपीएफ के जवानों की तादाद बढ़ाई गई, उनके कई शिविर बनाए गए, हेलीपैडों की संख्या में भी भारी वृद्धि की, आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए गए और ड्रोन जैसे आधुनिक संचार साधन भी मुहैया कराए गए। राज्यों की पुलिस से तालमेल बढ़ाया गया तथा उन्हें भी ऑपरेशनों में शामिल किया गया। विकास कार्य बढ़ाने के इसी क्रम में 12000 किलोमीटर पक्की सडक़ें बनाई गईं, 650 मोबाइल टॉवर लगाए गए और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था को सुधारा गया।

शस्त्र बलों ने घने जंगलों में ओक्टोपस, डबल बुल, चक्रबंध, ब्लैक फॉरेस्ट जैसे आक्रामक अभियान सफलता से चलाए जिसमें सैकड़ों नक्सली मारे गए जिनमें 28 नेता थे। इनमें दुर्दांत नक्सली नेता और सीपीआई का महासचिव वसवराजू, पाती राम मांझी, गणेश जैसे लीडर मारे गए और उनके बड़े ठिकाने ध्वस्त कर दिए गए। इसका असर साफ दिखने लगा और नक्सलवादी हिम्मत हारने लगे। सीआरपीएफ के जवानों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कई जगहों पर ऐतिहासिक विजय पाई और बड़े पैमाने पर कट्टर नक्सलवादियों का खात्मा कर दिया। बसवराजू का खात्मा करने के लिए सैकड़ों जवान 45 डिग्री के तापमान का मुकाबला करके छत्तीसगढ़-तेलांगना सीमा पर घने जंगलों में उसके अड्डे पर जा पहुंचे जहां मुठभेड़ में उसे कई साथियों के साथ मार डाला गया। उधर छत्तीसगढ़ के दुर्दांत नक्सली हिडिमा के एक एनकाउंटर में मारे जाते ही इस सशस्त्र आंदोलन की कमर टूट गई। यह वही नक्सली सरगना था जिसने दंतेवाड़ा में 76 जवानों की घात लगाकर हत्या करवाई थी। सशस्त्र बलों के दबाव से पिछले कुछ वर्षों में 2900 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया और 1900 मारे गए। 2024 से 30 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सुरक्षा बलों ने 706 से अधिक नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया है, जबकि 2200 से ज्यादा नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं और 4800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। केवल 2025 में ही 317 से अधिक नक्सली मारे गए और 800 से ज्यादा गिरफ्तार हुए।

यह कार्रवाई मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सीमा पर हुई है। अभी मार्च महीने में ही 50 लाख रुपए के इनामी पापा राव और एक अन्य बड़े नक्सली ने हथियार डाल दिए। उसके अलावा कोसा सोड़ी उर्फ सुकरू ने उड़ीसा में सरेंडर कर दिया। अब ताजा हालत यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य के सिर्फ तीन जिलों में यह आंदोलन सिमट कर रह गया है और यह दम तोड़ चुका है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का अंत कर दिया जाएगा। गृह मंत्रालय ने इसके अनुरूप योजनाएं बनाईं और हमारे साहसी जवानों ने जान पर खेलकर उन्हें कार्यान्वित किया। सरकार के उठाए गए आर्थिक कदमों का असर साफ दिखाई दिया। गांवों और आदिवासी इलाकों में आर्थिक स्थिति में सुधार आने से नक्सलवादियों को अपने काडर में भर्ती के लिए लोग मिलने बंद होने लगे। उनका परोक्ष प्रतिरोध होने लगा। उन्हें मुफ्त में रसद मिलनी बंद हो गई। इससे वे दबाव में आने लगे। दूसरी तरफ सशस्त्र बलों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और हर जगह मुकाबला किया। इससे उनका मूवमेंट कम होता चला गया और सूचनाएं मिलनी कम हो गर्इं। वे हताशा की स्थिति में आने लगे और कई तो मुख्यधारा में चले आए। राज्य सरकारों ने केन्द्र की मदद से उनके पुनर्वास की नीतियों पर काम शुरू कर दिया है और उन्हें हर तरह की मदद दी जा रही है। अब सरकार को विकास कार्य तेजी से करते रहना होगा ताकि उन इलाकों में लोग खुशहाल हों और फिर से ऐसी स्थितियां न बनें।-मधुरेंद्र सिन्हा

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930