बीजेपी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कांग्रेस शासनकाल में हुए कथित पट्टा वितरण और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया. उनके इस बयान के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है. देवासी ने कहा कि आने वाले समय में एक सूची सार्वजनिक की जाएगी. जिसमें यह खुलासा होगा कि कांग्रेस सरकार के दौरान किन-किन लोगों और अपने हितैषियों को पट्टे दिए गए.
मंत्री देवासी ने कहा कि आज जो लोग राम झरोखा प्रकरण को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उन्हीं के नाम और उनके कार्यकर्ताओं के नाम से वहां बिल्डिंग और होटल बने हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2001-02 में जिस प्रकार अनियमितताएं हुईं. उसी तरह 2019, 2022 और 2023 के दौरान भी कई मामलों में भ्रष्टाचार हुआ है, जिसका पूरा जवाब बीजेपी देगी.
राम झरोखा प्रकरण पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
राज्य मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राम झरोखा भूमि पर कांग्रेस शासन के दौरान जिन लोगों को पट्टे दिए गए, उनमें उस समय के संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और मंडल अध्यक्ष स्तर के लोग भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले का ‘पूरा चिट्ठा’ जल्द सार्वजनिक किया जाएगा. देवासी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा लगातार राम झरोखा पट्टा प्रकरण को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर बने हुए हैं. लोढ़ा ने इस मामले को सार्वजनिक मंचों पर उठाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है. इसके जवाब में मंत्री की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
जांच होगी या बयानबाजी तक सीमित रहेगा मामला
मंत्री के इस बयान के बाद अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या राज्य सरकार इस कथित पट्टा प्रकरण और भ्रष्टाचार के आरोपों की औपचारिक जांच कराएगी या फिर यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्री द्वारा बताई गई सूची सार्वजनिक होती है और उसमें ठोस दस्तावेजी आधार सामने आता है, तो यह मामला जिले की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है. वहीं दूसरी ओर, यदि जांच की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तो इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी के रूप में भी देखा जा सकता है.
स्थानीय राजनीति में बढ़ी हलचल
राम झरोखा पट्टा प्रकरण को लेकर पहले से ही सिरोही की राजनीति में गर्माहट बनी हुई है. बीजेपी स्थापना दिवस के मंच से आए इस बयान ने एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोपों की जंग को तेज कर दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मंत्री द्वारा कही गई ‘सूची’ कब सामने आती है और क्या प्रशासनिक स्तर पर किसी जांच की पहल होती है.



















