मध्यप्रदेश में दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के कछुओं की तस्करी से जुड़े बड़े मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय, भोपाल ने आरोपी दीपक पारखे की जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह मामला रेल नेटवर्क के जरिए लंबे समय से संचालित हो रहे एक संगठित तस्करी गिरोह से जुड़ा हुआ है. अदालत के इस फैसले को वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है. स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की सटीक विवेचना और अभियोजन पक्ष की मजबूत दलीलों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया.

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जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला

रेल नेटवर्क के माध्यम से मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुओं की तस्करी में संलिप्त आरोपी दीपक पारखे की प्रथम जमानत याचिका जिला एवं सत्र न्यायालय, भोपाल द्वारा खारिज कर दी गई है. आरोपी दीपक पारखे, निवासी इंदौर, ने न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. फिलहाल आरोपी लगभग दो माह से केंद्रीय जेल, भोपाल में निरुद्ध है और मामले की विवेचना अभी जारी है.

जांच एजेंसियों की पैरवी

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, भोपाल इकाई द्वारा की गई विस्तृत जांच और अभियोजन पक्ष की प्रभावी दलीलों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया. इसी के आधार पर यह माना गया कि मामला न केवल गंभीर है, बल्कि संगठित वन्यजीव अपराध से जुड़ा हुआ है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है.

ट्रेन से तस्करी का खुलासा

3 फरवरी 2026 को स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश (भोपाल), रेलवे सुरक्षा बल और वन मंडल भोपाल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान पटना–इंदौर एक्सप्रेस में संत हिरदाराम नगर स्टेशन पर एक बड़ी सफलता मिली थी. इस दौरान प्रथम श्रेणी कोच में अटेंडेंट के रूप में कार्यरत आरोपी अजय सिंह राजपूत, निवासी इंदौर, के कब्जे से 311 जीवित दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए जब्त किए गए थे. इस संबंध में तत्काल वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया.

कई शहरों में एक साथ छापेमारी

गिरफ्तार आरोपी से फॉरेस्ट रिमांड के दौरान पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन के बाद प्रदेश के कई शहरों नीमच, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, देवास, उज्जैन, नागदा और शाजापुर के साथ-साथ प्रदेश के बाहर लखनऊ में भी एक साथ छापेमार कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई में जलीय वन्यजीव कछुओं के अवैध व्यापार में संलिप्त एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ.

अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से रेल नेटवर्क के माध्यम से कछुओं की अवैध तस्करी में सक्रिय था. इस प्रकरण में अब तक मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के विभिन्न शहरों से कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं.

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