डॉ. कार्तिकेय गोयल, निदेशक, जनगणना संचालन, छत्तीसगढ़ ने की नागरिकों से स्व-गणना पूर्ण करने की अपील

छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित जनगणना 2027 के अंतर्गत शुरू की गई डिजिटल स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया को नागरिकों से उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। जनगणना संचालन निदेशालय, छत्तीसगढ़ से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक राज्य में 13,937 नागरिकों ने स्व-गणना की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है, जबकि 6,188 लोगों ने पंजीकरण कर प्रक्रिया प्रारंभ की है, परंतु अभी उसे पूर्ण नहीं किया है। इस प्रकार कुल 20,125 नागरिक स्व-गणना पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं, जो इस डिजिटल पहल के प्रति बढ़ते विश्वास और जागरूकता को दर्शाता है।
भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य आगामी दशक के लिए सटीक और विश्वसनीय सामाजिक-आर्थिक डेटा तैयार करना है। यह डेटा न केवल नीतियों के निर्माण में सहायक होगा, बल्कि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार भी बनेगा। जनगणना 2027 के इस चरण में नागरिकों को पहली बार स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया गया है, जिससे वे अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इस पहल से पारदर्शिता और सटीकता दोनों में वृद्धि हुई है तथा नागरिक सशक्तिकरण को भी बल मिला है।
डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है। नागरिकों को पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी के माध्यम से प्रमाणीकरण करना होता है। इसके पश्चात परिवार के मुखिया द्वारा आवास की स्थिति, पेयजल के स्रोत, ऊर्जा के साधन तथा परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा और व्यवसाय से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। प्रक्रिया पूर्ण होने पर एक डिजिटल संदर्भ संख्या (सीआरएन) प्राप्त होती है, जिसे भविष्य में सत्यापन के समय प्रगणकों को प्रस्तुत करना होगा, जिससे डेटा मिलान का कार्य त्वरित और त्रुटिरहित तरीके से किया जा सके।
राज्य के सभी 33 जिलों और 19,978 ग्रामों में इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं। राज्य सरकार द्वारा 62,500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम तैनात की गई है, जिसमें 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं। ये अधिकारी डिजिटल उपकरणों के माध्यम से डेटा संग्रहण एवं सत्यापन का कार्य कर रहे हैं। नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1855 भी सक्रिय है, जहां किसी भी प्रकार की समस्या या शंका का समाधान किया जा रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्रित की जाने वाली सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। इस डेटा का उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा तथा इसे किसी भी कानूनी जांच या कर निर्धारण के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा।
इसी क्रम में डॉ. कार्तिकेय गोयल, निदेशक, जनगणना संचालन, छत्तीसगढ़ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस डिजिटल पहल में बढ़-चढ़कर भाग लें और स्व-गणना की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि यह अभियान आने वाले दशक के लिए सटीक सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण का आधार बनेगा और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही इसका उद्देश्य पूर्ण हो सकेगा।
प्रारंभिक आंकड़े यह दर्शाते हैं कि छत्तीसगढ़ के नागरिक इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। आने वाले समय में स्व-गणना करने वाले नागरिकों की संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे राज्य को एक सशक्त, सटीक और विश्वसनीय डेटा आधार प्राप्त होगा, जो भविष्य की विकास योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

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