हावड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर काफी चहल पहल है। सड़क के किनारे स्ट्रीट वेंडर्स अपना सामान सजाए हुए हैं। चाय की ठेली है तो फलों की भी। प्लास्टिक के सामान के साथ की नमकीन के दुकान भी। हावड़ा ब्रिज के एक किनारे में चाय बेचने वाले के पास खड़े होकर कुछ लोग चाय पी रहे हैं। क्या चुनावी माहौल है ये पूछने पर जवाब मिला- काम हुआ है, इसलिए ठीक लग रहा है। कहा यहां भीड़ और ट्रैफिक तो हमेशा का है लेकिन सड़क पहले से अच्छी हुई है और लाइट भी लग गई हैं। थोड़ा आगे बढ़ी तो दो महिलाएं ऑफिस जाने के लिए बस का इंतजार कर रही है। उनसे सुरक्षा को लेकर बात की तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई दिक्कत यहां नहीं है। कई बार घर लौटते हुए देर भी हो जाती है लेकिन ऐसा डर का माहौल नहीं है। फल बेच रही महिला से पूछा, सरकार जो पैसा दे रही है मिल रहा है? जवाब मिला हां, हर महीने 1500 रुपये। पहले 1000 रुपये मिलते थे।

हर महीने महिलाओं को मिल रहे 1500 रुपये

दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दे रही है। कुछ महीने पहले ही इसे 1000 से बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया है। इसके लिए कोई इनकम क्राइटीरिया भी नहीं है, ये सभी महिलाओं को मिल रहा है, जो भी इसे लेना चाहें। महिला वोटर्स यहां काफी अहम हैं और टीएमसी नेता और मुख्यमंत्री खुद महिला होने के नाते महिलाओं पर ज्यादा फोकस भी है। इस स्कीम का चुनाव में कितना असर होगा ये तो बात में पता चलेगा लेकिन इसका राजनीतिक असर साफ दिखता है।

बीजेपी ने किया है यह वादा

बीजेपी ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आई तो महिलाओं को 3000 रुपये हर महीने देगी, यानी जितना अभी मिल रहा है उसका डबल। लेकिन क्या महिलाएं इस पर भरोसा कर रही हैं, इसका अलग अलग जवाब मिला। हावड़ा में ही महिलाओं के एक ग्रुप ने कहा कि जो अभी मिल रहा है वह तो है, ज्यादा जब मिलेगा तब देखेंगे। उन्होंने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि दीदी हमें दे रही है, बाद में कौन क्या देता है पता नहीं।

बीजेपी के सामने ये चुनौतियां

बीजेपी के सामने यहां चुनौती लोगों को यह भरोसा दिलाने की भी है कि वे इस स्कीम को जारी रखेंगी और ज्यादा फायदा देंगी। पिछले दो सालों में जिन जगहों में भी विधानसभा चुनाव हुए हैं वहां महिला वोटर्स ने अहम भूमिका निभाई है और सब जगह सत्ताधारी पार्टी ने महिलाओं के अकाउंट में सीधे पैसे ट्रांसफर करने की स्कीम भी लागू की, जिसका चुनाव में उन्हें फायदा भी दिखा।

पहले था वामपंथ का गढ़
हावड़ा का यह इलाका पहले वामपंथ का गढ़ रहा है। यहां लोग बताते हैं कि एक वक्त था जब यहां एकतरफा नतीजे आते थे। लेकिन 2011 के बाद से समीकरण बदले हैं और अब मुकाबला सीधा हो गया है। 2021 के चुनाव में भी यहां बहुत कम अंतर से नतीजा आया था, जिससे यह साफ हो गया कि वोट बंटे हुए हैं। इस इलाके में बंगाली मतदाताओं के साथ बड़ी संख्या में हिंदीभाषी, मारवाड़ी और गुजराती व्यापारी समुदाय के लोग भी है। साथ ही दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबारी भी बड़ी संख्या में हैं।

हावड़ा उत्तर विधानसभा सीट पर एक नजर

  • पिछले तीन बार से इस सीट पर लगातार टीएमसी जीत रही है
  • उससे पहले यह सीट सीपीएम के पास थी
  • पिछले विधानसभा चुनाव में कड़ा मुकाबला दिखा
  • टीएमसी और बीजेपी उम्मीदवार के बीच करीब 5000 वोट का ही अंतर रहा
  • इसे स्विंग विधानसभा सीट माना जा रहा है
  • कामकाजी वर्ग और छोटा व्यापारी इस सीट पर ज्यादा
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