ईटानगर: पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले शहीद तागे हैल्यांग का परिवार उनकी यादों को सहेजने में जुटा है। भारतीय वायु सेना में कॉर्पोरल रहे हैल्यांग की याद में उनके पैतृक गांव ताजांग के पास एक स्मारक बनाया जा रहा है। इसका उद्घाटन 22 अप्रैल को ही करने की योजना है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि उनके बेटे की कहानी लोगों तक पहुंचाना है। परिवार का कहना है कि इस स्मारक के माध्यम से लोगों को बताना चाहते हैं कि तागे हैल्यांग की मौत क्यों हुई।
स्मारक में एक लेख भी रखा जाएगा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हैल्यांग के बड़े भाई तागे टाका ने बताया कि स्मारक में एक लेख भी शामिल किया जाएगा। इस लेख में उनके जीवन, सेवा और शहादत का विवरण होगा। उनका कहना है कि लोग जानें कि तागे हैल्यांग कौन थे और उन्होंने किन परिस्थितियों में अपनी जान गंवाई। इस स्मारक का मुख्य आकर्षण उनकी कांस्य प्रतिमा होगी जो उनके जीवन और सेवा की स्थायी याद बनेगी।
परिवार अभी भी सदमे में
इस बीच सेना में शामिल उनका एक और भाई स्मारक समारोह की तैयारियों में शामिल होने के लिए घर लौट आया है।
पहलगाम हमले के एक साल बाद भी परिवार इस सदमे से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।
तागे टाका बताते हैं कि उनके माता-पिता अब भी इस क्षति से जूझ रहे हैं, खासकर उनकी मां के लिए यह दर्द बेहद गहरा है।
परिवार के सभी सदस्य मिलकर उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
सिर्फ 30 साल के थे तांगे
बता दें कि हैल्यांग महज 30 वर्ष की उम्र में शहीद हुए। वो 2017 में वायु सेना में शामिल हुए थे और श्रीनगर एयरबेस पर तैनात थे। हमले से कुछ महीने पहले ही उनकी शादी चारो कामहुआ से हुई थी और उनका तबादला असम हो गया था। ड्यूटी जॉइन करने से पहले वे अपनी पत्नी के साथ पहलगाम घूमने गए थे। जहां आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला कर दिया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले में जान गंवाने वालों में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक शामिल था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और हैल्यांग के परिवार पर गहरा दुख छोड़ गया।



















